कोटा उत्तर निगम बोर्ड की बैठक में हुआ जमकर हंगामा, कांग्रेसी पार्षदों ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए अपनी ही पार्टी की मेयर को घेरा (वीडियो)
• बैठक में हंगामे के बीच आधे घंटे बाद ही अचानक शुरू हो गया राष्ट्रगान, फिर खत्म कर दी गई बैठक
• मेयर जाने लगीं तो कांग्रेस की महिला पार्षद उनकी गाड़ी के आगे खड़ी हो गईं, मेयर को वापस अपने चेम्बर में लौटना पड़ा
• मेयर बोलीं -बजट मैंने पढ़ लिया, प्रस्तावित बजट में 701.35 करोड़ रुपए की आय व 697.84 करोड़ रुपए के व्यय का प्रावधान
एनसीआई@कोटा
कोटा उत्तर नगर निगम की बोर्ड बैठक बुधवार अपराह्न 3 बजे शुरू हुई। बैठक शुरू होते ही कांग्रेसी पार्षदों ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान एक बार तो ये पार्षद वार्डों को कचरा मुक्त करने की मांग को लेकर वेल में आ गए। हंगामा इतना ज्यादा रहा कि बोर्ड बैठक आधे घंटे में ही खत्म हो गई। बैठक के बाद भी कांग्रेसी पार्षदों ने अपने वार्डों की समस्याओं को महापौर के सामने रखा।

इस बीच कांग्रेस और बीजेपी के पार्षद भी एक दूसरे के सामने हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इन्होंने हाथों में तख्ती और बैनर लिए हुए थे। इस हालात के चलते नगर निगम का सभा भवन जंग का मैदान सा नजर आने लगा था।
कुरैशी के आरोप के बाद से शुरू हुआ हंगामा
बैठक शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही उप महापौर सोनू कुरैशी ने उनका खराब माइक बदलने की मांग की, लेकिन उन्हें दूसरा माइक नहीं दिया गया। इस बात पर भी हंगामा हुआ। इसके बाद कांग्रेस के दूसरे पार्षद भी अपनी-अपनी समस्याएं रखने लगे। इससे काफी हंगामेदार स्थिति पैदा हो गई। कांग्रेसी पार्षद दो बार वेल में आ गए और अपनी मांगों के पोस्टर लहराए। करीब आधे घंटे चली बैठक के पूरे समय हंगामा चलता रहा। इसी बीच राष्ट्रगान शुरू हुआ और इसके बाद बैठक खत्म हो गई।

बैठक खत्म होने के बाद कांग्रेसी पार्षदों ने महापौर के चेम्बर में जा पहुंचे। इन्होंने यहां विभिन्न मुद्दे उठाते हुए महापौर मंजू मेहरा को खरी-खोटी सुनाई। इस बीच महापौर गाड़ी में बैठकर जाने लगीं तो कांग्रेस की महिला पार्षद उनकी गाड़ी के आगे खड़ी हो गईं और काफी देर तक आक्रोश जताया। इसके बाद महापौर गाड़ी से उतरकर वापस अपने चेम्बर में आ गईं। इस पर कांग्रेसी पार्षद भी वापस वहां पहुंच गए।
आयुक्त व सभी अधिकारियों ने अपनाया तानाशाही रवैया
उप महापौर सोनू कुरैशी ने कहा कि हम एक साल से बोर्ड मीटिंग की मांग करते आ रहे हैं। इसके लिए धरने-प्रदर्शन किए। बड़ी मुश्किलों से बोर्ड की मीटिंग हुई। इसमें कोटा उत्तर के वार्डों के साथ हो रहे भेदभाव का मामला रखने की बात महापौर से कही। तब महापौर ने कहा कि बारी-बारी से सब अपनी बात रखें, लेकिन आयुक्त व सभी अधिकारियों ने तानाशाही रवैया अपनाया। जबरन राष्ट्रगान बजवा कर मीटिंग को बर्खास्त करवा दिया।

कुरैशी का कहना था कि पहले मेरा माइक बंद किया। मैंने माइक चालू करने की डिमांड की तो मेरा माइक चालू करने की बजाय नेता प्रतिपक्ष का माइक दे दिया, जिसकी आवाज तेज थी। इन्होंने साजिश करके मेरा माइक बंद कर किया। बोर्ड बैठक में हम संविधान और कोटा की जनता की बात कर रहे थे। हम जनता से जुड़े मुद्दों की बात कर रहे थे। इन लोगों ने आम जनता की बात को कहने नहीं दिया। सबसे बड़ी दुख की बात है कि बोर्ड कांग्रेस का है, महापौर कांग्रेस की हैं। इसके बावजूद अधिकारियों ने खुद के पावर का यूज किया। उन्होंने बजट पारित करवाना चाहा ही नहीं।
बजट नहीं पढ़ा था, तब एक-एक कर बात रखने के लिए कहा था
इसके जवाब में महापौर मंजू मेहरा ने कहा- बजट मैंने पढ़ लिया है। जब पहले मैंने बजट नहीं पढ़ा था, तब मैं कह रही थी कि एक-एक करके अपनी बात रखें। उप महापौर सोनू कुरैशी व पार्षद संतोष बैरवा ने अपनी बात रखी, लेकिन उनकी बात पूरी नहीं हो पाई। सदन में शोर शराबा होने लगा, इसलिए हमने बजट पढ़ लिया। जब महापौर से पूछा गया कि राष्ट्रगान आपकी परमिशन से हुआ था क्या? इस बात का उन्होंने जवाब नहीं दिया।
बजट में ये रखे गए प्रावधान
मंजू मेहरा ने कहा कि कोटा उत्तर निगम के वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रस्तावित बजट में 701.35 करोड़ रुपए की आय व 697.84 करोड़ रुपए के व्यय के प्रावधान का अनुमान रखा गया है। बजट में आय पिछले वित्तीय वर्ष के बजट से 262. 89 करोड़ रुपए अधिक और खर्च 164. 54 करोड़ रुपए अधिक सम्भावित है।
