केडीए का अब कोटा चिड़ियाघर को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव, विरोध में उठ खड़े लोग (वीडियो)
–विनोद गौड़
कोटा।
केडीए (Kota Development Authority) विकास के नाम पर बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो कर रहा है, मगर इनमें से कुछ बेहद विवादास्पद साबित हुई और शहरवासियों को आंदोलित कर दिया।
ऐसी घोषणाओं में पहले तो वोकेशनल स्कूल को स्थानांतरित कर उसकी जगह पर मिनी सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव शामिल रहा। इसका भी स्थानीय लोगों ने विरोध किया। अब ऐसा ही एक नया मामला कोटा चिड़ियाघर को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का सामने आया है। इसकी जगह पर खेल संकुल बनाने की योजना का पता चला है। इस योजना के विरोध में भी पर्यावरणविद् और वन्यजीव प्रेमियों के साथ विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोग भी विरोध में उतर गए हैं। इन सबका कहना है कि यह चिड़ियाघर कोटा की शान है। इसके अलावा इसे कोटा में जैव विविधता और पशु-पक्षियों के आश्रय के परम्परागत स्थल के रूप में जाना जाता है। ऐसे में यहां के प्राकृतिक आवासों को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। यह अलग बात है कि कोटा के राजनेताओं ने इस मसले पर फिलहाल तक तो चुप्पी ही साध रखी है।
इस गम्भीर विषय पर नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में ही एक मीटिंग का आयोजन किया गया। इसमें पगमार्क संस्थान के देववृत हाड़ा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर्यावरण गतिविधियों के महानगर प्रमुख वेद प्रकाश गुप्ता, डॉ. पृथ्वी पाल सिंह, पूर्व वन अधिकारी बिम्बाधर शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार धीरज गुप्ता, सुशील सिंह, संजय पारीक, डॉ. विनीत महोबिया, आर्किटेक्ट ज्योति सक्सेना, पूर्व अभियंता भुवनेश सिंघल,शेख जुनैद,मनीष त्रिपाठी, अमित जैन आदि ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए और संघर्ष समिति के गठन की बात कही। इसके लिए ‘अपना संस्थान’ की शीघ्र बैठक होगी। राष्ट्रीय जल बिरादरी, कोटा एनवायरमेंटल सेनिटेशन सोसायटी, बाघ -चीता मित्र आदि के सदस्यों ने भी इस मौके पर विचार व्यक्त किए।
अभी करवाएं हैं 1 करोड़ रुपए के कार्य
यहां गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व ही चिड़ियाघर में बड़े स्तर पर रख-रखाव व मरम्मत का कार्य करवाया गया है। इनमें पक्षी घर ओपन एरिया ऑडिटोरियम और वॉकिंग ट्रेक, पानी, रोशनी और पेंटिंग शामिल हैं। परम्परागत पिंजरों की ऊंचाई व आकार बढ़ाकर रिनोवेट भी करवाया गया।
यह है अभी चिड़ियाघर की स्थिति
• वन्यजीवों के पिंजरे रेस्क्यू करके लाए गए जानवरों के लिए प्रवास की सुविधा।
• विभिन्न प्रकार के देसी-विदेशी दुर्लभ स्पीशीज के पक्षियों के एंक्लोजर।
• खुले में रहने वाले विभिन्न पशु पक्षियों के घोंसले आदि।
• उपवन संरक्षक कार्यालय चिड़ियाघर प्रबंधन प्रशासनिक भवन।
.• विभिन्न प्रकार के वृक्ष। करीब डेढ़ सौ साल पुराने वृक्ष भी यहां पर हैं। बरगद, गूलर आम, जामुन, बहेड़ा, सहजन, गूलर, नीम के सैकड़ों वृक्ष हैं।
किसने-क्या कहा?
चिड़ियाघर को बचाने के लिए हम सभी संकल्पित हैं। इसके लिए आंदोलन करना पड़ा तो इसके लिए भी रूपरेखा बनाएंगे।
–बृजेश विजयवर्गीय
अध्यक्ष, जलविरादरी
कोटा वैसे भी पर्यावरण और तापमान के लिहाज से रेड जोन में आता है। पठारी क्षेत्र के कारण यहां तेजी से तापमान बढ़ता है। ऐसे में शहर में जितनी ज्यादा ग्रीनरी बढ़ाई जा सके बढ़ानी चाहिए। ऐसा पहले से बने हुए इन ऐतिहासिक धरोहरों को संजोये रखने से ही हो सकता है।
–डॉ सुधीर गुप्ता।
संयोजक हम लोग
निर्णय उच्च अधिकारियों के हाथों में
चिड़ियाघर की स्थापना 1905 में की गई थी। हमारे पास कोटा विकास प्राधिकरण से पत्र आया है। हमने यहां की वस्तु स्थिति से उन्हें अवगत करा दिया है। आगे का निर्णय उच्च अधिकारियों के हाथ में है।
–अनुराग भटनागर
उपवन संरक्षक वन्य जीव, कोटा
