पंथ द्वारका पिंपली धरी पत्रिका जाए, नरसी पाछा फिरया जदुपति लई उठाई, नानी बाई के मायरे के दूसरे दिन हुआ हुंडी भक्तिरस प्रसंग
एनसीआई@बूंदी
शहर के सदर बाजार स्थित शृंग भवन में चल रहे संगीतय नानी बाई के मायरे के दूसरे दिन रविवार को कथा व्यास गोपाल कृष्ण महाराज ने नरसी के जीवन से जुडे हुंडी भक्तिरस प्रसंग का वर्णन किया।
कथा व्यास गोपाल कृष्ण महाराज ने कहा कि साधु संत 700 रुपए नरसी जी को प्रदान करके गए तो, वह द्वारिका गए। वहां श्री सांवल साहा द्वारिका में नगर के राजा ने कहा कि यह नरसी ढोंगी है। यदि भक्त है तो श्री ठाकुर जी के गले में जो माल है, यह नरसी के कंठ में प्रदान हो। तब नरसी जी ने पूरी रात भजन गाए। तब राजा की पत्नी ने आकर रात में पानी पिलाया और तड़के 4 बजे श्री ठाकुर जी के कंठ में जो माला थी, वह माला सुबह नरसी जी के गले में पाई गई। तब संसार वालों को यह एहसास हुआ की भक्ति जागृति है।
कथा व्यास गोपाल कृष्ण जी महाराज ने आगे कहा कि नरसी मेहता की बेटी कमरी बाई की बेटी तुलसी का जब विवाह उत्सव हुआ, तब लग्न पत्रिका लिखी गई तो नरसी मेहता को कुमकुम पत्रिका मिली। उसमें अपार माहिरा लिख दिया। गोकुल जी महाराज वह कुमकुम पत्रिका लेकर जूनागढ़, गुजरात में नरसी मेहता के घर पहुंचे। वह कुमकुम पत्रिका नरसी मेहता एक पीपल के पेड़ के नीचे रख के भगवान से याचना करते हैं। पंथ द्वारका पिंपली धरी पत्रिका जाए। नरसी जी पाछा फिरया जदुपति लई उठाई। इस दौरान नानी बाई के मायरे का हुंडी प्रसंग सुनने के लिए शृंग समाज की महिलाएं बड़ी तादात में मौजूद रहीं।
