जयपुर के महारानी कॉलेज में मजार मामले पर बढ़ा बवाल, कांग्रेस ने की एएसआई सर्वे की मांग, बीजेपी एमएलए ने कहा-मुस्लिम समाज खुद हटाए
एनसीआई@जयपुर
जयपुर के महारानी कॉलेज परिसर में बनी तीन मजारों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस विधायक अमीन कागज़ी का दावा है कि ये मजारें 1942 में बनी थीं, जबकि भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक ढांचे को अनुचित बताया और मुस्लिम समाज से इन्हें हटाने की अपील की। बढ़ते विवाद को देखते हुए प्रशासन ने कॉलेज के गेट पर पुलिस तैनात कर दी है। बिना इजाजत किसी को कॉलेज में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके साथ ही कॉलेज के अंदर भी पुलिस के जवान सुरक्षा में तैनात हैं और मजारों के पास सादी वर्दी में पुलिसकर्मी लगातार निगरानी रख रहे हैं।
इस बीच कांग्रेस विधायक अमीन कागज़ी ने दावा किया है कि कॉलेज केम्पस में जो तीन मजारें हैं, वे कॉलेज बनने से पहले की हैं और साल 1942 में बनाई गई थीं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ये मजारें कॉलेज की जमीन पर बनी हैं और मजारों पर मालिकाना हक का कोई दस्तावेज किसी परिवार के पास नहीं है। अमीन कागज़ी ने राज्य सरकार से मांग की है कि एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) से इन मजारों का सर्वे कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वहीं, बीजेपी ने इस पूरे मामले पर कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि कॉलेज जैसी शैक्षणिक जगह पर मजारें होना ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को खुद आगे आकर इन मजारों को हटाने के लिए पहल करनी चाहिए।
फिलहाल, राजस्थान सरकार इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं ले पाई है कि इन मजारों को वहीं रहने दिया जाए या हटाया जाए। इस विवाद पर अब राज्य की राजनीति भी गर्म हो गई है और सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
कॉलेज के लोगों का यह है कहना
कॉलेज के पम्प ऑपरेटर रमेश चंद शर्मा का कहना है कि इनमें से एक मजार काफी पुराने समय से मौजूद है, जिसे वह लम्बे समय से देखता आ रहा है। हालांकि बाकी दो मजारें कब बनीं, इस बारे में उसे जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि ये मजारें पिछले एक-दो साल से ही दिखाई देने लगी हैं। दूसरी ओर, कॉलेज की छात्राओं का कहना है कि उन्होंने पहले कभी कॉलेज परिसर में किसी मजार को नहीं देखा। ये मजारें महारानी कॉलेज की प्रिंसिपल के सरकारी आवास के सामने बनी हुई हैं। कॉलेज और सरकारी आवास के बीच दीवार होने के कारण छात्राओं का उस तरफ आना-जाना नहीं होता।
