राजस्थान: लोक अदालत में 19 साल के बेटे ने मां-बाप को वापस मिलवाया, विवाद के चलते 6 साल से रह रहे थे अलग
एनसीआई@जालोर
जालोर में रविवार को आयोजित हुई लोक अदालत में 19 साल के बेटे ने 6 साल से अलग रह रहे माता-पिता को साथ रहने के लिए समझाया। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को माला पहनाई और पूरा परिवार घर के लिए साथ-साथ निकल गया। यहां मौजूद लोगों ने मां-बाप को लोक अदालत तक लाने के लिए बेटे की तारीफ भी की।
बाल कल्याण समिति की सदस्य और वकील सरिता चौधरी ने बताया कि, जालोर के पिजोपुरा गांव निवासी सांवलाराम देवासी व खेड़ा गांव निवासी भूरी देवी की वर्ष 2004 में हिन्दू रीति-रिवाज से शादी हुई थी। 15 साल तक तो इनके बीच सबकुछ ठीक चला, मगर बाद में विवाद होना शुरू हो गया। इसके बाद दोनों वर्ष 2019 से अलग रहने लगे। दोनों के तीन बेटे भी हैं। इनमें सबसे बड़ा हमीराराम, उसके बाद भरत व फिर तेजाराम है।

भूरी देवी ने 3 साल पहले बाल कल्याण समिति के सामने यह मामला रखा था। इसमें पति से भरण-पोषण दिलाने के लिए मामला दर्ज करवाया था। पति सांवलाराम ने इसके बाद भरण-पोषण राशि देनी शुरू कर दी। साथ ही इनका केस कोर्ट में भी चल रहा था। इससे पूरा परिवार मानसिक तनाव झेल रहा था।
बड़े बेटे ने मां को समझाया फिर पिता को राजी किया
इस दौरान 19 साल के सबसे बड़े बेटे हमीराराम ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। वह लगातार मां-बाप से इस मामले को लेकर समझाइश करता रहा। दोनों छोटे भाइयों की परवरिश की दुहाई देता रहा। इसके बाद मामला लोक अदालत में पेश किया गया। लोक अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राजेन्द्र सिंह चारण ने इनकी समझाइश की। इसके बाद दोनों पति-पत्नी सांवलराम और भूरी देवी के बीच समझौता हो गया। लोक अदालत में दोनों ने एक दूसरे को माला पहनाकर जीवन भर साथ निभाने की कसम खाई।
