वैलेंटाइन डे (14 फरवरी) पर विशेष: यह क्षणिक उत्सव या शाश्वत समझ?
–अमिता शर्मा
आज का वैलेंटाइन डे अक्सर लाल गुलाब, महंगे उपहारों और सोशल मीडिया पर चमकने वाली ‘फिल्टर्ड’ तस्वीरों तक सीमित रह गया है। प्रेम यहां एक वार्षिक आयोजन बन गया है-जो क्षणिक है, चमकदार है और अक्सर सतही है। ऐसे दौर में जब रिश्ते ‘राइट स्वाइप’ और ‘ब्लॉक’ के बीच झूल रहे हैं, विलियम शेक्सपियर के प्रेम-सोनेट हमें याद दिलाते हैं कि प्रेम केवल प्रदर्शन की वस्तु नहीं, बल्कि आत्मसात् करने का विषय है।

अडिगता का प्रमाण: सोनेट 116
शेक्सपियर का सोनेट 116 प्रेम को उसकी पूर्णता में परिभाषित करता है। वे लिखते हैं— “Love is not love which alters when it alteration finds”। अर्थात यह वह प्रेम नहीं है जो परिस्थितियां बदलते ही बदल जाए। इस प्रकार आज के अस्थिर समय में यह सोनेट हमें सिखाती है कि प्रेम जीवन की आंधियों के बीच एक ‘ध्रुव तारे’ की तरह है, जो स्वयं नहीं हिलता, पर भटकते हुए जहाजों को मार्ग अवश्य दिखाता है।
स्वार्थ से सृजन तक: सोनेट 1
अक्सर प्रेम को केवल अपनी खुशी तक सीमित मान लिया जाता है, लेकिन सोनेट 1 सुंदरता और प्रेम की ‘नैतिक जिम्मेदारी’ की बात करता है। जो प्रेम केवल अपने तक सीमित रह जाता है और बांटा नहीं जाता, वह समय के साथ संकुचित होकर नष्ट हो जाता है। यह सोनेट प्रेम को आत्मकेन्द्रित भावना से निकालकर उसे सृजन और उत्तरदायित्व से जोड़़ता है।
दिखावा बनाम सुगंध: सोनेट 54
आज के दौर में ‘आकर्षण’ को ही ‘प्रेम’ समझ लिया जाता है। सोनेट 54 सौंदर्य को नैतिकता के साथ जोड़ता है। शेक्सपियर कहते हैं कि गुलाब केवल इसलिए सुंदर नहीं होता है कि वह दिखता अच्छा है, बल्कि इसलिए कि उसमें ‘सुगंध’ होती है। उसी प्रकार, सच्चा प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण से नहीं, बल्कि चरित्र की सच्चाई और साझा मूल्यों से टिका रहता है।
फिल्टर रहित यथार्थ: सोनेट 130
सोशल मीडिया के इस युग में जहां हर कोई ‘परफेक्ट’ दिखने की होड़ में है, सोनेट 130 सबसे बड़ी चोट करता है। यह किसी का ‘देवीकरण’ करने या अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा करने का विरोध करता है। यह सिखाता है कि प्रेम किसी को उसकी कमियों और मानवीय सीमाओं के साथ स्वीकार करने का साहस है। जब हम दिखावे के ‘फिल्टर’ हटा देते हैं, तभी वास्तविक रिश्ता शुरू होता है।
निष्ठा और वापसी: सोनेट 109
अपूर्णता मनुष्य का स्वभाव है। सोनेट 109 प्रेम में भटकाव और वापसी की बात करता है। दूरियां आ सकती हैं, गलतियां हो सकती हैं, पर सच्चा प्रेम वही है जो बार-बार उसी केन्द्र की ओर लौट आता है। यह प्रेम की एक मानवीय और सच्ची तस्वीर पेश करता है।
निष्कर्ष
इन 5 सोनेट के लिहाज से विश्लेषण करने पर वैलेंटाइन डे का अर्थ पूरी तरह बदल जाता है। यह केवल एक दिन ‘आई लव यू’ कहने का औपचारिक अवसर नहीं रह जाता, बल्कि प्रेम को स्थायी, ईमानदार और उत्तरदायी बनाने की प्रतिज्ञा बन जाता है।
शायद यही वह बिंदू है, जहां शेक्सपियर का प्रेम दर्शन मीरा की कृष्ण भक्ति के धरातल से आकर मिल जाता है। यहां प्रेम केवल एक बाहरी उत्सव नहीं रह जाता, बल्कि स्वयं को पूर्णतया अर्पित कर देने की एक ‘मौन साधना’ बन जाता है। अतः आज आवश्यकता इस बात की है कि हम किसी को गुलाब देने से पहले उस प्रेम की खुशबू को पहचानें, जो समय के थपेड़ों और सत्य की कसौटी पर भी जीवित रह सके।
जानें-
शेक्सपियर के नाम से प्रसिद्ध विलियम शेक्सपियर (1564-1616) अंग्रेजी भाषा के एक महान कवि, नाटककार और अभिनेता थे, जिन्हें अक्सर अंग्रेजी का सर्वश्रेष्ठ लेखक और दुनिया का सबसे महान नाटककार माना जाता है। इन्होंने 38 से अधिक नाटक और कई कविताएं लिखीं। शेक्सपियर का जन्म इंग्लैंड के स्ट्रेटफ़ोर्ड-अपॉन-एवन में हुआ था, उनके काम आज भी विश्व भर में पढ़े और मंचित किए जाते हैं।
सोनेट (Sonnet)
14 पंक्तियों की एक निश्चित काव्य शैली (कविता) को कहा जाता है। यह आमतौर पर आयम्बिक पेंटामीटर में लिखी जाती है और इसमें एक विशेष तुकबंदी योजना होती है। यह इतालवी शब्द ‘सॉनेटो’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘छोटा गीत’। यह मुख्य रूप से प्रेम, सुंदरता और मृत्यु जैसे विषयों को व्यक्त करती है, जिसे आमतौर पर दो मुख्य प्रकारों-पेट्रार्कन (इतालवी) और शेक्सपियरियन (अंग्रेजी) में विभाजित किया जाता है।
13वीं शताब्दी में इटली में जन्मी यह विधा, आज एक लोकप्रिय काव्य शैली है, जो प्रेम और अन्य गहन भावनाओं को व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
