दोस्त के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले प्रोफेसर को कार ने मारी जोरदार टक्कर, हो गई मौत, दोस्त घायल, कार चालक पर हत्या का आरोप
एनसीआई@पाली
एमआईटीएस (MITS) कॉलेज के सहायक प्रोफेसर और उनके दोस्त को बुधवार सुबह तेज गति से आई एक कार ने पीछे से जोरदार टक्कर मारी। इससे सहायक प्रोफेसर दस फीट से अधिक ऊंचाई तक उछल कर सिर के बल नीचे गिरे। इससे उनकी मौत हो गई। वहीं इनके दोस्त गम्भीर घायल हो गए। उनका बांगड़ अस्पताल में इलाज चल रहा है। ये दोनों साढे़ छह बजे करीब मॉर्निंग वॉक पर निकले थे।
मारवाड़ जंक्शन के आदर्श नगर निवासी महेन्द्र नाथ (42) पुत्र लक्ष्मण नाथ जाडन के पास स्थित एमआईटीएस कॉलेज में सहायक प्रोफेसर थे। वह फाइनेंस का काम करने वाले आदर्श नगर निवासी रणजीत बोराणा (37) पुत्र सोहनलाल बोराणा के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इस दौरान बिजलीघर-होमगार्ड ऑफिस के पास काफी तेज गति से आई एक कार ने इन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इससे करीब 14 फीट ऊपर तक उछल कर नीचे गिरे महेन्द्र नाथ व गम्भीर घायल उनके दोस्त रणजीत बोराणा को बांगड़ अस्पताल ले जाया गया, जहां महेन्द्र नाथ को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं रणजीत का इलाज जारी है।

महेन्द्र नाथ के परिजनों ने इसे सामान्य दुर्घटना की जगह कार चालक पर जानबूझकर टक्कर मार हत्या करने का आरोप लगाया है। साथ ही पुलिस पर सही कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया है। इसके चलते परिजन शव को पोस्टमॉर्टम के बाद घर ले जाने की बजाय मारवाड़ जंक्शन थाने ले गए और वहां बाहर बैठ गए। ये इस मामले की रिपोर्ट हत्या की धारा में दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार करने व उसकी कार जब्त करने की मांग करने लगे। इस पर मारवाड़ जंक्शन थाने के एएसआई पुखराज ने बताया कि थाने के बाहर धरने पर बैठे परिजन को समझाया गया। इसके बाद वे शव लेकर घर के लिए रवाना हो गए।

कार चालक परिचित, हुई थी अनबन
सहायक प्रोफेसर महेन्द्र नाथ के भाई मोहित ने बताया कि आरोपी कार चालक मारवाड़ जंक्शन का ही निवासी है। वह पहले इनके मोहल्ले में रहता था। तब उनके भाई महेन्द्र नाथ से उसकी किसी मामले में तकरार होने से अनबन चल रही थी। इसी मामले में आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। मोहित का कहना था कि इसी रंजिश के चलते उसने उनके भाई की हत्या करने के इरादे से ही टक्कर मारी थी।

आठ साल का है बेटा
महेन्द्र नाथ के 8 साल का बेटा है। उसका ‘ढूंढ’ 3 मार्च को होना है। इससे परिवार में खुशी का माहौल था, मगर इस हादसे से परिवार में मातम पसर गया है। उल्लेखनीय है ढूंढ होली से पहले वाली फागुन की ग्यारस को पूजा जाता है। जिस घर में बेटे का जन्म होली के पहले होता है, वहां यह रस्म ज़रूर निभाई जाती है। अब बेटियों के जन्म के उपरांत भी ढूंढ की पूजा होने लगी है। जब तक बच्चे की ढूंढ की पूजा नहीं हो जाती, तब तक बच्चे के मस्तक पर तिलक आड़ा ही लगाया जाता है।
