राजस्थान: साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला, रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को डेढ़ महीने तक रखा डिजिटल अरेस्ट, 10 लाख रुपए देने के बाद दिल्ली सीबीआई ऑफिस बुलाया, तब सामने आई सच्चाई
एनसीआई@झुंझुनूं
देश में साइबर ठगी की लगातार बढ़ती जा रही घटनाओं के बीच केन्द्र सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय से रिटायर्ड एक कर्मचारी के साथ भी साइबर ठगों ने बहुत सनसनीखेज वारदात को अंजाम दे डाला। वह ऐसे कि साइबर ठगों ने इन्हें खौफ दिखाकर डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस बीच 10 लाख रुपए भी ठग लिए। ठग खुद को सीबीआई का असिस्टेंट डायरेक्टर बताता रहा। यह पीड़ित सेवानिवृत कर्मचारी जब सीबीआई ऑफिस पहुंचे, तब जाकर उन्हें खुद के ठगे जाने का पता चला। यह घटना जिले के गुढ़ागौड़जी थाना इलाके के रघुनाथपुरा गांव की है।

थानाधिकारी राम मनोहर ठोलिया ने इसकी जानकारी देते हुए बताया-हरलाल सिंह जाट (80) निवासी रघुनाथपुरा,गुढ़ागौड़जी ने साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वह 31 जुलाई 2006 को केन्द्र सरकार मंत्रिमंडल सचिवालय से रिटायर हुए थे। 13 सितम्बर 2024 को दोपहर 12.30 बजे एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस से बोल रहा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कस्टम ने विदेश जा रहा एक पार्सल पकड़ा है। इसमें 16 फर्जी पासपोर्ट, 56 एटीएम और 140 ग्राम एमडी (ड्रग्स) है।
उस व्यक्ति ने पार्सल की संख्या बताई और इनका नाम और आधार संख्या बताते हुए कहा कि यह पार्सल 11 सितम्बर को भारत से क्वालालंपुर, मलेशिया जाने वाला था। इस पर हरलाल सिंह जाट ने कहा कि उन्होंने तो ऐसा कोई पार्सल नहीं भेजा है। मगर कॉल करने वाले व्यक्ति ने उनकी बात पर ध्यान दिए बगैर इनकी चल-अचल सम्पत्ति और बैंक अकाउंट के ब्योरे मांगे और ये सब जानकारी देते गए।
विश्वास दिलाने के लिए पहचान पत्र की कॉपी भेजी
हरलाल सिंह जाट ने बताया कि, उन्हें दिल्ली पुलिस के सुनील कुमार की पहचान पत्र की कॉपी भेजी गई, ताकि यकीन हो जाए कि दिल्ली पुलिस ही मुझसे पूछताछ कर रही है।

इसके अलावा एक केस रिपोर्ट फाइल भी उन्होंने भेजी। इसमें स्पेशल डायरेक्टर सीबीआई प्रवीण सूद लिखा हुआ था। इसमें हरलाल सिंह जाट पर मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई आरोप लगाए हुए थे। यह कॉपी उन्हें ऑनलाइन भेजी गई। साथ ही इनसे कहा गया कि खाते से 10 लाख रुपए आरबीआई को ट्रांसफर किए जाएं। खाता धारक का नाम सांवरिया एंटरप्राइजेज था। उसके खाते में इनसे 10 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए।
पैसे ट्रांसफर होने के बाद जाट को नोटेरी पब्लिक ऑफ दिल्ली की कॉपी भी ऑनलाइन भेज दी गई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद का परिचय अजीत श्रीवास्तव, असिस्टेंट डायरेक्टर, सीबीआई के रूप में दिया।
उस व्यक्ति ने 4 अक्टूबर को नोटेरी पब्लिक दिल्ली की तरफ से लिखे एक पत्र की फोटो कॉपी भी जाट को भेजी। इसमें लिखा- आरबीआई ने किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नहीं पाई है। फंड का स्टेटस भेजकर सीबीआई को आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
सीबीआई का अधिकारी बन गया ईडी का अफसर
6 अक्टूबर को इसी कथित अजीत श्रीवास्तव ने जो अब तक सीबीआई का असिस्टेंट डायरेक्टर बन कर बात कर रहा था, उसने ईडी का डायरेक्टर बनकर बात की। वह हरलाल सिंह जाट पर और पैसे के लिए दबाव बनाता रहा। मगर जाट ने कहा कि मैं आपसे दिल्ली आकर मिलूंगा और बाकी बची रकम आरबीआई में जमा करा दूंगा।
इस पर उसे कथित अजीत श्रीवास्तव ने इनसे कहा कि 24 अक्टूबर को दिल्ली में सीबीआई हेड क्वार्टर पहुंच कर मिलें। इस पर जाट 24 अक्टूबर को दिल्ली सीबीआई हेड क्वार्टर पहुंचे और जिस नम्बर से इनके पास कॉल आता था, उस पर कॉल किया। इस पर इनसे सीबीआई हेड क्वार्टर की तस्वीर दिखाने को कहा गया। जाट ने ऐसा ही किया। तब इनसे रिसेप्शन पर बैठने को कहा गया। सामने वाले ने यह भी कहा कि मैं आपके पास आदमी भेजता हूं, जो आपको मेरे ऑफिस में ले आएगा।

इसके बाद हरलाल सिंह जाट एक घंटे से भी अधिक समय तक रिसेप्शन पर बैठे रहे, मगर न तो कोई बुलाने वाला आया और न ही कोई कॉल आई। तब जाकर उन्होंने रिसेप्शन अधिकारी को बताया कि एक घंटे से अजीत श्रीवास्तव नामक अधिकारी ने मिलने के लिए बैठा रखा है। इस पर रिसेप्शन अधिकारी ने कम्प्यूटर से चेक करके बताया कि इस नाम का कोई भी अधिकारी सीबीआई हेड क्वार्टर में नहीं है। तब जाकर हरलाल सिंह जाट को उनके साथ हुई ठगी का पता चला। फिर उन्होंने घर लौटकर गुढ़ागौड़जी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
मामले का जल्द कर देंगे खुलासा-एसपी
झुंझुनूं एसपी शरद चौधरी ने इस सम्बन्ध में कहा-रिटायर्ड सचिवालय कर्मचारी से डिजिटल अरेस्ट के जरिए फ्रॉड किया गया है। इन्होंने दिल्ली सचिवालय में काफी लम्बी सेवाएं दी हैं। इन्हें भी धोखा देने में साइबर ठग कामयाब रहे। कोशिश करेंगे कि ट्रांजेक्शन में गया पैसा रिटर्न करा पाएं और ठगों को गिरफ्तार करें।
