‘ये भगत सिंह की धरती है। क्रांति बमों या पिस्तौलों से नहीं आती, विचारों से आती है। विचार कभी नहीं मरते।’ यह कहते हुए शेरसिंह ने पुलिस बैज उतारकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को पकड़ा दिया था। साथ ही कॉन्स्टेबल पद से इस्तीफे का ऐलान भी कर दिया था।
एनसीआई@नई दिल्ली
सिपाही शेर सिंह को उत्तराखंड पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। पिथौरागढ़ के पुलिस सुपरिटेंडेंट ने ये कार्यवाही की है। शेर सिंह ‘जेन-जी आंदोलन’ के दौरान जंतर-मंतर पर भाषण और सरकारी नौकरी से इस्तीफे की घोषणा कर चर्चा में आया था।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प के बाद शेर सिंह ने अपने भाषण में कहा था कि ‘हम इन गुंडों (पुलिस प्रशासन) से निपटेंगे।’ आगे यह भी कहा था कि ‘ये भगत सिंह की धरती है। यहां क्रांति बमों या पिस्तौलों से नहीं आती, विचारों से आती है। विचार कभी नहीं मरते।’ ये सब कहने के बाद उसने अपना पुलिस बैज उतारकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को पकड़ा दिया था और कॉन्स्टेबल पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया था।
पहले से ही सस्पेंड चल रहा था
इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि शेरसिंह को पहले से ही सस्पेंड है। यानी इस्तीफा देने की घोषणा करने से पहले ही वो निलम्बित था।
उत्तराखंड की पुलिस महानिदेशक निवेदिता कुकरेती ने यह जानकारी देते हुए कहा था कि पिथौरागढ़ में तैनात कांस्टेबल शेर सिंह को 28 जून से अनुपस्थित रहने के कारण 20 जुलाई को ही निलम्बित कर दिया गया था। उससे अनुपस्थित रहने पर स्पष्टिकरण मांगा गया था, जिसका जवाब न देने पर यह कार्यवाही की गई थी। हालांकि, शेरसिंह ने बाद में दावा किया था कि उसने पहले ही इस्तीफा दे दिया था, मगर उसे स्वीकार नहीं किया गया था।
विभागीय जांच के बाद हुई कार्यवाही
वहीं, इस मामले में पता चला है कि शेरसिंह पर गम्भीर अनुचित व्यवहार का आरोप था। विभागीय जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ ने यह कार्यवाही की है। इस कार्रवाई पर उत्तराखंड पुलिस ने कहा कि अनुशासन, सत्यनिष्ठा और सेवा आचरण के मानकों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
