फैसले के इंतजार में अदालत के बाहर जमा लोग।
एनसीआई@मेड़ता (नागौर)
नागौर जिले के डांगावास में 11 साल पहले 23 बीघा जमीन को लेकर हुए विवाद में 5 दलितों की हत्या कर दी गई थी। बुधवार को मेड़ता के एससी-एसटी स्पेशल कोर्ट के जज आशीष बिजराणियां ने अपने फैसले में सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। इधर, पीड़ित पक्ष के गोविंद मेघवाल ने कहा- जब सभी लोग बरी हो गए तो हमारे 5 लोगों की हत्या किसने की, हम हाईकोर्ट जाएंगे।

घटनाक्रम के अनुसार, 14 मई 2015 को जमीन विवाद में एक पूर्व के रतनाराम मेघवाल, पोखरराम मेघवाल, पांचाराम मेघवाल, खेमाराम मेघवाल व गणपतराम मेघवाल तथा दूसरे पक्ष के रामपाल गोसाईं की हत्या हुई थी। इनमें से 3 व्यक्तियों की हत्या ट्रेक्टर से कुचलकर की गई थी। इस वारदात की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

वकील बोले- जिन्हें आरोपी बनाया, वे घटना में शामिल नहीं
मामले में आरोपी पक्ष के वकील महेंद्र चौधरी ने बताया- घीसाराम से चिमनाराम ने यह जमीन खरीदी थी। गलती सिर्फ इतनी हुई कि उसके नाम से नामांतरण नहीं हुआ था। इस वजह से दूसरे पक्ष के लोगों ने जमीन पर कब्जा करने के लिए झोपड़ी बना ली थी। इस बात को सीबीआई ने अपनी जांच में शामिल ही नहीं किया।
जब कुछ लोगों ने इनसे समझाइश का प्रयास किया तो यह मारपीट और हत्याएं हुईं। वहां समूह में 250-300 लोग नहीं पहुंचे थे। कब्जे की बात की जैसे जानकारी मिलती रही, वैसे लोग वहां पहुंचते गए। लेकिन जिन 40 लोगों को आरोपी बनाया, वो घटना में शामिल नहीं थे।

वहीं, एडवोकेट महिपाल लटियाल ने बताया कि बचाव पक्ष में 8 गवाह पेश किए गए थे, वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से 82 गवाह पेश हुए थे।
वर्ष 2019 में हाईकोर्ट ने अपनाया था कड़ा रुख
वर्ष 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में कड़ा रुख अपनाया था। कोर्ट ने फरार चल रहे बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए ट्रायल को तीन महीने रोकने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद पुलिस की विशेष टीमों ने दबिश देकर सीबीआई की ओर से नामजद किए गए सभी 40 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था।

