एनसीआई@कठुआ
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में मंगलवार सायं करीब साढ़े सात बजे एक सीआईएसएफ जवान ने साथियों से हुए विवाद के बाद उन पर फायरिंग कर दी। इससे 4 सीआईएसएफ जवानों की मौत हो गई। मृतकों में एक असिस्टेंट कमांडेंट भी शामिल है। इनके नाम असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल रफीक अहमद और कॉन्स्टेबल संदीप कुमार थे।

सीआईएसएफ के ये जवान हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे बसोहली के पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। यहां दो जवानों के बीच बहस हुई, इसी दौरान एक ने फायरिंग कर दी।
कठुआ पुलिस ने आरोपी जवान अभिदेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात की जानकारी मिलते ही सीआईएसएफ के सीनियर अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए।
आरोपी के पास AK-47 राइफल और 150 गोलियां थीं
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी हेड कॉन्स्टेबल अभिदेश कुमार सिंह ने ऑफिस के परिसर में घुसकर अपनी सरकारी AK-47 राइफल से अंधाधुंध फायरिंग की। उसके पास 150 राउंड गोलियां थीं। वह 2009 बैच का है। उसके खिलाफ सीआईएसएफ हेडक्वार्टर ने मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं।

जहां जवानों की तैनाती थी, वो प्रोजेक्ट 12 साल से बंद
सेवा-3 प्रोजेक्ट बसोहली तहसील में रावी नदी पर बना है। इसे 1993 में शुरू किया गया था। 2013 की बाढ़ में इसका 300 मीटर लम्बा हिस्सा बह गया था। तब से यह पूरी तरह बंद है।
गृह मंत्रालय ने बताए थे कई कारण
केन्द्रीय सुरक्षा बलों में तैनात जवानों की आत्महत्या और साथियों की हत्या की घटनाओं के कारण जानने के लिए अक्टूबर 2021 में गृह मंत्रालय की टास्क फोर्स बनाई थी।
घटनाओं पर कई बार रिव्यू कराया और 2022 में लोकसभा में भी कुछ कारण बताए थे। इनमें कुछ घटनाओं में छुट्टी न मिलने के कारण मानसिक रूप से परेशानी, कार्यस्थल पर तनाव जैसी वजहें सामने आईं।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, कुछ मामलों में सामने आया कि जवान एक-दूसरे के साथ किसी मामूली बात या बहस के बाद आपा खो देते हैं। इसके अलावा परिवार से दूर रहने और लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में रहने से जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
