एनसीआई@स्पोर्ट्स डेस्क
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय टीम के खाते में एक और गोल्ड मेडल आ गया है। टूर्नामेंट में अजेय रही भारतीय मेंस हॉकी टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर सोना जीता और खिताब का बचाव किया। इसके साथ ही टीम ने लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 2028 का टिकट भी कटा लिया है।
हरमनप्रीत सिंह ने दो गोल किए। जुगराज सिंह, हार्दिक और शिलानंद लाकड़ा ने 1-1 गोल किया। पहली बार पुरुष और महिला दोनों ने एक ही एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते। पहली बार पुरुषों ने लगातार दो बार एशियाई खेलों (2023, 2026) में स्वर्ण पदक जीते। इससे पहले भारत ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 4-3 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया था।
• कुल 85 मेडल
• 21 गोल्ड मेडल
• 27 सिल्वर
• 37 ब्रॉन्ज
पहले क्वार्टर में स्कोर 1-1
11वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। भारतीय खिलाड़ियों की लगातार कोशिशों और दबाव का आखिरकार फायदा मिला। पहला मौका हाथ से निकल गया, क्योंकि मनदीप का स्टॉप खराब था, लेकिन उन्होंने तुरंत बाद एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल करके अच्छा खेल दिखाया। इस बार हरमनप्रीत सिंह ने कोई गलती नहीं की और जोरदार ड्रेग-फ्लिक से गोलकीपर मुहम्मद जैमी मैट डेरिस को छकाते हुए गोल कर दिया।
इसके कुछ देर बाद ही मलेशिया ने जोरदार वापसी की। 14वें मिनट में शेल्लो सिल्वेरियस ने शानदार हाफ-वॉली से गोल दागा। उन्होंने हवा में आती गेंद को नीचे उतारा और टप्पा खाने के बाद उस पर शॉट मारकर दो बार की सिल्वर मेडलिस्ट टीम के लिए बराबरी का गोल किया।
दूसरा क्वार्टर
23 वें मिनट में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। शिलानंद लाकड़ा ने जबरदस्त तेजी दिखाई और मलेशिया के कुछ डिफेंडरों को छकाते हुए पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। जुगराज ने शॉट लिया और गेंद को मुहम्मद जैमी मैट डेरिस के पार पहुंचा दिया। यह इस टूर्नामेंट में उनका सातवां गोल है। दूसरे क्वार्टर तक भारत ने 2-1 की बढ़त बना रखी थी।
तीसरा क्वार्टर
तीसरे क्वार्टर में भारत को गोल के कई मौके मिले। पहले पेनल्टी पर जुगराज गोल नहीं कर पाए। नीलकांत फील्ड गोल नहीं कर सके। तीसरे पेनल्टी कॉर्नर को कप्तान हरमनप्रीत गोल में नहीं बदल पाए। भारत ने PC पर डिफ्लेक्शन की कोशिश की और अंपायर ने पेनल्टी स्ट्रोक दे दिया। मनदीप का डिफ्लेक्शन पोस्ट डिफेंडर के शरीर पर लगा। हार्दिक ने आगे बढ़कर स्ट्रोक को गोल के निचले-दाएं कोने में मार दिया और गोलकीपर मुहम्मद जैमी मैट डेरिस को गलत दिशा में छका दिया।
चौथा क्वार्टर
चौथे क्वार्टर के अंत में भारत को कई पेनल्टी कॉर्नर मिले। विवेक सागर को गेंद मिली और उनके पास से गेंद विपक्षी खिलाड़ी के पैर से टकराई। भारत के पास चौथे गोल का मौका था। इस बार अमित रोहिदास ने स्लॅप हिट लगाई, जो रशर के पैर से टकराई, इसलिए एक और PC मिला। दूसरा PC जुगराज ने लिया और वह भी पैर से टकराया। एक और PC। अब राजिंदर ने हिट लगाई, एक और PC। जुगराज की हिट फिर से पैर से टकराई और एक और रीटेक मिला।
जुगराज ने फिर से शॉट लिया। गेंद एक बार फिर पैर से टकराई। वे एक अलग तरह की चाल (variation) आजमाते हैं और दिलप्रीत रिटर्न पास को ठीक से कंट्रोल नहीं कर पाते। इस बार गोल होता है। अभिषेक दाईं ओर से दौड़ते हुए आगे बढ़ते हैं, गेंद डिफ्लेक्ट होकर शिलानंद के पास पहुंचती है और वे करीब से कोई गलती नहीं करते।
5वां गोल
साढ़े तीन मिनट बचे थे, दिलप्रीत अपनी ड्रिबलिंग स्किल्स दिखाई, उन्हें धक्का दिया जाता है और वे पेनल्टी कॉर्नर की मांग करते हैं। अम्पायर सहमत नहीं होते, लेकिन वे रिव्यू लेते हैं। दिलप्रीत वाकई सही निकले, वह धक्का ही था।
इस पेनल्टी कॉर्नर पर दो खिलाड़ी होते हैं। हार्दिक पुश के लिए, मनप्रीत पुश के लिए और हरमनप्रीत हिट के लिए। हरमनप्रीत गोल कर देते हैं। गेंद सीधे गोलकीपर के पास जाती है, जो प्रतिक्रिया देने में बहुत धीमे रह जाते हैं। इस प्रकार मैच के अंत में भारत के खाते में 5वां गोल आ जाता है।
हरमनप्रीत ने दागे 10 गोल
फाइनल में हरमनप्रीत सिंह के दो गोल उन्हें सर्वाधिक गोल करने वालों की लिस्ट में टॉप पर पहुंचाने के लिए काफी नहीं थे। पाकिस्तान के सुफयान खान टॉप पर रहे, जिन्होंने ब्रॉन्ज-मेडल मैच में गोल करके टूर्नामेंट का समापन 12 गोल के साथ किया। हरमनप्रीत 10 गोल के साथ दूसरे स्थान पर रहे। भारत के अभिषेक और दिलप्रीत सिंह 9-9 गोल के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे।
