एनसीआई@बूंदी
जिले के डाबी क्षेत्र में झाड़ियों में लावारिस हालत में मिले एक नवजात को आखिरकार माता-पिता का प्यार और एक सुरक्षित भविष्य मिल गया है। केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के माध्यम से इस बालक को बेंगलुरु के एक दम्पती ने गोद लिया है। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक रामराज मीणा ने यह जानकारी दी।
उपचार के बाद हो गया था स्वस्थ
सहायक निदेशक ने बताया कि विगत 14 अप्रेल 2026 को डाबी क्षेत्र की झाड़ियों में यह नवजात शिशु मिला था। सूचना मिलने पर बच्चे को तत्काल कोटा के जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका सघन उपचार हुआ। स्वस्थ होने के पश्चात बाल कल्याण समिति बूंदी ने बच्चे को अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद 28 अप्रेल 2026 से यह बालक राजकीय विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी बूंदी में आवासित था।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद शिशु को विधिक रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त घोषित किया गया। इसके बाद CARA के माध्यम से बेंगलुरु के दम्पती ने बालक को गोद लिया , जिससे नवजात के जीवन में नई उम्मीद की किरण जगी है।
जिला कलेक्टर ने की यह अपील
इस अवसर पर जिला कलेक्टर हरफूल सिंह यादव ने आम जनता से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि अनचाहे नवजात शिशुओं को झाड़ियों, कूड़ेदान या किसी भी असुरक्षित स्थान पर फेंक कर उनके प्राण संकट में न डालें।
यदि कोई भी माता-पिता या परिजन किसी कारणवश बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं तो वे शिशु को राजकीय अस्पतालों या शिशु गृहों में बने पालना गृह में सुरक्षित छोड़ दें या बाल कल्याण समिति बूंदी के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। वहां बच्चे की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है। आपका यह कदम एक मासूम की जान बचा सकता है और उसे एक सुनहरा भविष्य दे सकता है।”
ये रहे मौजूद
बेंगलुरु के दम्पती को बालक सौंपने की प्रक्रिया के दौरान संरक्षण अधिकारी गोविंद कुमार गौतम, दीपिका वशिष्ठ, परिता शर्मा व सरफराज आलम आदि रहे।
