सुरक्षा कारणों के चलते अभिनेता टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस के आरोपियों को रात में मुम्बई नहीं ले जाया गया है। पुलिस टीम रवाना होने के कुछ देर बाद वापस लौट आई। तीनों आरोपियों को कोटा के रेलवे कॉलोनी थाने में भारी सुरक्षा व कमांडो पहरे के बीच रखा गया है।
एनसीआई@कोटा/मुम्बई
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए फायरिंग मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को सतर्कता व सुरक्षा कारणों के चलते मुम्बई पुलिस ने रात के समय मुम्बई ले जाने का फैसला टाल दिया। कुछ दूर जाने के बाद पुलिसकर्मी इन आरोपियों को लेकर वापस रेलवे कॉलोनी थाने लौट आए।
फिलहाल तीनों आरोपियों को कोटा के रेलवे कॉलोनी थाने में ही कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद है कि थाने के बाहर भारी पुलिस बल और कमांडो तैनात किए गए हैं, जिससे पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रात के अंधेरे में किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब संभावना जताई जा रही है कि तड़के या सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीनों शूटरों को ट्रांजिट रिमांड पर मुम्बई के लिए रवाना किया जाएगा। कोटा रेलवे स्टेशन से पकड़े गए इन आरोपियों से मुम्बई पहुंचने के बाद वारदात के मुख्य षड्यंत्रकारियों और हथियारों के स्रोतों को लेकर गहन पूछताछ की जाएगी।
कल रविवार को हुई थी वारदात
उल्लेखनीय है कि रविवार शाम जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों में से दो ने 5-6 राउंड गोलियां चलाईं थीं। बाद में इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। तीनों को सोमवार सुबह राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल कोच से पकड़ा गया। मुम्बई पुलिस ने साफ किया कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में से कोई भी नाबालिग नहीं है। इनमें एक की उम्र 18 साल, जबकि बाकी दो की उम्र 22-22 साल है।
मुम्बई पुलिस को उन्हें महाराष्ट्र ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड भी मिल गई थी। पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी सूरत की तरफ भागे और फिर जयपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए थे। वे कथित तौर पर जयपुर से बस के जरिए दिल्ली और फिर नेपाल जाने की योजना बना रहे थे।
मुम्बई पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपियों की तलाश के लिए क्राइम ब्रांच की 20 विशेष टीमें लगाई गई थीं। तकनीकी निगरानी और दूसरे राज्यों की पुलिस से मिले सहयोग के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया गया।
