जयपुर-जोधपुर सहित 6 सीटों के तीन-तीन टुकड़े करने का प्रस्ताव, इनमें से 4 पर हैं बीजेपी सांसद
एनसीआई@जयपुर
राजस्थान में वर्तमान में लोकसभा की 25 सीटें हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की परिसीमन पर तैयार स्टडी रिपोर्ट के आधार पर इन्हें बढ़ाकर 38 करने की सिफारिश की गई है। इस रिपोर्ट में लोकसभा की 13 नई सीटें बनाने के लिए वर्तमान की 7 लोकसभा सीटों को दो और तीन भागों में बांटने का सुझाव है।
इनमें चूरू लोकसभा सीट को दो भागों में बांटकर एक और नई लोकसभा सीट बनाने की सिफारिश की गई है। वहीं, जयपुर, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर, सीकर, उदयपुर और बांसवाड़ा सीटों को तीन-तीन भागों में बांटने का प्रस्ताव है। बाकी 18 लोकसभा सीटों को यथावत रखने का सुझाव दिया गया है। साफ है कि इनकी सीमाओं में किसी तरह का बदलाव या छेड़छाड़ नहीं करनी है।
इन 7 सीटों को बांटने की है सिफारिश
राजस्थान में जिन 7 सीटों को बांटने की सिफारिश की गई है, उनमें 4 पर बीजेपी के और 3 पर विपक्षी पार्टियों के सांसद हैं। जोधपुर से केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत सांसद हैं। उदयपुर से बीजेपी के मन्नालाल रावत, जयपुर से बीजेपी की मंजू शर्मा और जयपुर ग्रामीण से राव राजेन्द्र सिंह बीजेपी सांसद हैं। बांसवाड़ा सीट से बीएपी के राजकुमार रोत, सीकर से सीपीएम के अमराराम सांसद हैं। जिस चूरू की सीट को दो हिस्सों में बांटने की सिफारिश है, वहां से कांग्रेस के राहुल कस्वां सांसद हैं।

किसी एससी सीट को तोड़ने की सिफारिश नहीं
परिसीमन के बाद एससी, एसटी सीटों की भी संख्या बढ़ेगी। रिपोर्ट में दो एसटी सीटों को तोड़ने का सुझाव है, किसी एससी सीट को तोड़ने की सिफारिश नहीं की है। प्रदेश में अभी एससी के लिए 4 और एसटी के लिए 3 सीटें रिजर्व हैं। बीकानेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर और करौली- धौलपुर सीट एससी के लिए आरक्षित है। उदयपुर, बांसवाड़ा- डूंगरपुर और दौसा लोकसभा सीट एसटी के लिए आरक्षित है।
रिपोर्ट में अपनाए गए मापदंड अलग
पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद की परिसीमन पर तैयार स्टडी रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। हालांकि परिसीमन पर फाइनल फैसला परिसीमन आयोग करता है। पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद की इस स्टडी रिपोर्ट ने परिसीमन का संभावित गणितीय मॉडल प्रस्तावित किया है। इस रिपोर्ट को मानना या नहीं मानना परिसीमन आयोग पर निर्भर है। पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट में नई सीटों के मापदंड परिसीमन आयोग से अलग हैं।

हर चीज के लिए मापदंड तय
सभी लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में आबादी का अनुपात लगभग एक समान रखा जाता है। क्षेत्रफल के हिसाब से भी समानता रखने का प्रावधान है। एक लोकसभा क्षेत्र में आने वाले उपखंड, तहसील, विधानसभा सीट के पूरे इलाके शामिल करने का मापदंड तय है। लोकसभा सीट में किसी भी विधानसभा क्षेत्र, तहसील के पूरे इलाके को ही शामिल किया जाता है। किसी भी विधानसभा क्षेत्र, तहसील को दो अलग अलग लोकसभा सीटों में नहीं रखा जाता है।
राजस्थान में 1977 के बाद नहीं बढ़ी लोकसभा की सीटें
राजस्थान में 1977 के लोकसभा चुनावों में सीटों की संख्या 23 से बढ़ाकर 25 की गई थी। तबसे लोकसभा की सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 2001 में 84वें संविधान संशोधन के तहत देशभर में लोकसभा की सीटों की संख्या को 2026 तक फ्रीज कर दिया गया था। इनकी संख्या को घटाने-बढ़ाने पर रोक लगाई गई थी। इसके कारण 2008 में हुए परिसीमन में सीटों की संख्या नहीं बदली।
