हैदर अली खान बोले-मुसलमानों का भाजपा पर भरोसा, टूटेगा आजम का गुरूर, स्वार में बनेगा जीत का रिकॉर्ड
हैदर अली खान के पिता नवाब काजिम अली चार बार विधायक रह चुके
एनसीआई@रामपुर (उत्तर प्रदेश)
यूपी विधानसभा चुनाव में तगड़े सियासी दांव पेच का खेल जारी है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सहयोगी अपना दल (एस) की प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट से कांग्रेस की दिग्गज नेता नूर बानो के पौते हैदर अली खान को मैदान में उतार कर बड़ा दांव लगा दिया है। भाजपा के खेमे के किसी दल ने 2014 के बाद किसी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया है।
हैदर अली खान ने मीडिया से कहा कि इस बार स्वार सीट पर रिकॉर्ड जीत मिलेगी। वहीं, उन्होंने आजम परिवार पर तंज कसते हुए कहा कि इस परिवार ने जनता के लिए कुछ करने का बजाए उनके घर तोड़े। यही नहीं, यह तो मजार तोड़कर रोड तक बना चुके हैं। हैदर अली खान ने दावा किया कि यह ऐतिहासिक चुनाव होगा। वह डेढ़ लाख से अधिक वोटों से जीतेंगे।

हैदर अली खान ने कहा, ‘मैं सबसे पहले अपनी नेता और अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मुझे पर भरोसा जताया। इसके अलावा मैं सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के साथ पीएम नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान और अनुराग ठाकुर का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन सभी ने मुझ पर भरोसा दिखाया है।’ साथ ही कहा कि यह, ‘यह मुस्लिमों के लिए ऐतिहासिक चुनाव होगा, क्योंकि अभी सभी कह रहे हैं कि यह सीट हम जीतेंगे और हमारी बात विधानसभा में सुनी जाएगी।’
मुसलमानों को भाजपा और एनडीए पर पूरा भरोसा
हैदर अली खान ने मुस्लिम प्रत्याशी के सवाल पर कहा कि, ‘ मैं इस विश्वास को कायम रखूंगा और भारी मतों से सीट जीतकर जिन लोगों ने मुझे पर भरोसा दिखाया है, उन्हें समर्पित करूंगा। साथ ही कहा कि मुसलमानों का भाजपा पर पूरा विश्वास है। तीन तलाक वाले मामले को लेकर हमारी माताओं और बहनों ने भाजपा और एनडीए को जमकर वोट दिया था। हालांकि आजम खान जैसे लोग समाज के अंदर भाजपा को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। असल में वही साम्प्रदायिकता का माहौल बनाकर फायदा उठाना चाहते हैं।’
अब्दुल्ला को लेकर कही ये बात
वहीं, हैदर ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम के स्वार विधानसभा से चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि, ‘पहले अब्दुल्ला अपना पर्चा तो भर लें।उनके पास दो बर्थ सर्टिफिकेट हैं। वह किससे अपना नामांकन करेंगे। अगर वह जेल से बाहर आने के बाद आंसू बहा रहे हैं तो ये उनका ड्रामा है। वह जनहित में नहीं बल्कि चोरी और घोटाले की वजह से जेल गए थे। वह 10 मार्च के बाद फिर जेल जाएंगे। इसके साथ कहा कि लालपुर का पुल टूटा था, उससे हर मजहब और हर जाति के लोगों को तकलीफ हुई थी। यही नहीं, व्यापारियों का धंधा ठप हो गया था। इन्होंने लोगों के घर भी तोड़े हैं और यह मजार तक तोड़ चुके हैं, जिस पर हर मजहब के लोग जाते हैं। इन्होंने मजार तोड़कर जबरदस्ती रोड बना डाली। अगर किसी और ने ऐसा किया होता तो दंगे हो जाते। इससे पहले आजम भी ऐसे ही आंसू बहाया करते थे, यह कोई नई बात नहीं है।
जीत को लेकर किया दावा
हैदर ने कहा कि हम स्वार पर डेढ लाख से अधिक वोटों से जीतेंगे। जनता हमारे पक्ष में है और उसका भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। साथ ही आजम खान और अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के लिए इस परिवार ने कुछ नहीं किया। बस मुस्लिम और हिंदुओं के नाम पर बांटा है। इस बार आजम परिवार का गुरूर टूट जाएगा।
क्या अपना दल में जाने की ये है वजह?
दिलचस्प बात यह है कि यूपी में भगवा खेमे के किसी दल ने 2014 के बाद पहली बार मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव खेला है। हालांकि 36 साल के हैदर अली खान को यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस ने 13 जनवरी को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। इसके बाद उन्होंने पाला बदलकर अपना दल (एस) का दामन थाम लिया। इसके बाद अपना दल ने उन्हें स्वार से टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। हैदर अली खान कांग्रेस की दिग्गज नेता नूर बानो के पोते हैं, जबकि एसेक्स यूनिवर्सिटी से स्नातक हैदर के पिता नवाब काजिम अली और सपा सांसद आजम खान के बीच लम्बे समय से अदावत है। यही नहीं, वह स्वार और तत्कालीन बिलासपुर से चार बार विधायक रह चुके हैं। 2017 में काजिम ने बसपा के टिकट पर स्वार सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सपा उम्मीदवार और आजम के बेटे अब्दुल्ला से हार गए थे। इसके बाद दिसम्बर 2019 में अब्दुल्ला का गलत हलफनामे की वजह से विधायक पद चला गया। इसके शिकायतकर्ता हैदर के पिता काजिम ही थे। वैसे रामपुर जिले में नवाब परिवार और आजम खान के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है और यह लम्बे समय से चली आ रही है।
यही नहीं, नवाब परिवार से सम्बन्ध रखने वाली रामपुर की पूर्व सांसद बेगम नूर बानो के पौत्र हैदर अली दूसरे उम्मीदवार हैं, जो कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद टिकट ठुकराकर अन्य दल के उम्मीदवार बने हैं। हैदर अली खान को कांग्रेस ने 13 जनवरी को अपनी पहली सूची में स्वार से उम्मीदवार बनाया था। इससे पहले बरेली की छावनी सीट से विधानसभा की कांग्रेस प्रत्याशी घोषित सुप्रिया ऐरन ने सपा का दामन थाम लिया था। वैसे उसी सूची में बेगम नूर बानो के पुत्र और हैदर अली के पिता काजिम अली खान को रामपुर से कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित किया गया। उल्लेखनीय है कि पिछली बार भाजपा ने अपना दल को 11 सीटें दी थीं। इनमें से 9 पर उसे जीत मिली थी। उस वक्त पार्टी ने कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारा था।
