April 22, 2026

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गुजरात दंगा: एटीएस का बड़ा एक्शन, तीस्ता सीतलवाड़ और एक पूर्व आईपीएस गिरफ्तार, 3 के खिलाफ एफआईआर

गुजरात दंगा: एटीएस का बड़ा एक्शन, तीस्ता सीतलवाड़ और एक पूर्व आईपीएस गिरफ्तार, 3 के खिलाफ एफआईआर

सुप्रीम कोर्ट ने 24 जून को गुजरात दंगे पर एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई की थी। इस दौरान कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के पिछले रिकॉर्ड और भूमिका का जिक्र भी एसआईटी की रिपोर्ट और गुजरात सरकार की दलीलों के हवाले से किया था।

एनसीआई@मुम्बई/अहमदाबाद

गुजरात दंगा मामले में झूठी जानकारी देने के आरोप में शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ सहित दो पूर्व आईपीएस अफसर संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। अहमदाबाद शहर की पुलिस अपराध शाखा के इंस्पेक्टर दर्शनसिंह बी बराड की शिकायत पर यह कार्यवाही की गई है।

इसके बाद गुजरात एटीएस ने मुम्बई के जुहू पहुंचकर तीस्ता सीतलवाड़ को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। वहीं अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार को गिरफ्तार किया है।

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एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने जकिया जाफरी के जरिए कोर्ट में कई याचिकाएं लगाईं और एसआईटी प्रमुख और दूसरे आयोग को गलत जानकारियां दीं।

तीस्ता के स्टाफ ने जांच टीम का रास्ता रोका

जानकारी के मुताबिक गुजरात एटीएस की दो टीमें मुम्बई पहुंचीं। एक टीम सांताक्रूज पुलिस स्टेशन गई तो दूसरी टीम मुम्बई पुलिस के साथ तीस्ता सीतलवाड़ के जुहू स्थित घर गई। इसके बाद टीम उन्हें हिरासत में लेकर सांताक्रूज थाने पहुंच गई।

जानकारी के मुताबिक जब तीस्ता को टीम ने जीप में बैठाने की कोशिश की तो उसके ऑफिस के कर्मचारियों और समर्थकों की जांच टीम से बहस हुई। उन्होंने तीस्ता को जीप से ले जाने के लिए रोकने की भी कोशिश की।

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मुम्बई पुलिस ने गुजरात पुलिस के दिए गए सभी दस्तावेजों की जांच की। अब एटीएस उन्हें अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के ऑफिस लेकर आ रही है।

पूर्व आईपीएस आरबी श्रीकुमार अरेस्ट

वहीं, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि गुजरात दंगा मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल होने के दावेदारों के बयान मामले में राजनीतिक रूप से सनसनी पैदा करने वाले थे।

दरअसल संजीव भट्ट, हिरेन पंड्या और आरबी श्रीकुमार ने एसआईटी के सामने जो बयान दिया था वह निराधार और झूठे साबित हुए। जांच में पता चला कि ये लोग तो लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई गई उस मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए थे।

आईपीसी की इन छह धाराओं में दर्ज हुआ केस

468- धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी करना।

471- जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना।

194- दोष साबित करने के इरादे से झूठे सबूत देना।

212- अपराधी को शरण देना।

218- पब्लिक सर्वेंट द्वारा किसी को सजा या सम्पत्ति जब्ती से बचाने के इरादे से गलत रिकॉर्ड तैयार करना।

211- खुद को चोट पहुंचाकर हमले का झूठा आरोप लगाना।

तीस्ता के बारे में छानबीन की जरूरत: एससी

24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे पर एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को रद्द कर दिया था। इस याचिका को जाकिया जाफरी ने दाखिल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द करते हुए कहा था तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी।

अपने हित के लिए तीस्ता ने चीजों को गढ़ा

कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ इसीलिए इस मामले में लगातार घुसी रहीं, क्योंकि जकिया अहसान जाफरी इस पूरे मामले में असली पीड़ित हैं।

तीस्ता अपने हिसाब से उनको इस मुकदमे में मदद करने के बहाने उनको नियंत्रित कर रही थीं, जबकि वो अपने हित साधने की गरज से बदले की भावना रखते हुए इस मुकदमे में न केवल दिलचस्पी ले रही थीं, बल्कि अपने मनमुताबिक चीजें भी गढ़ रही थीं। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने यह फैसला सुनाया था।

दिसम्बर 2021 से हो रही थी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सात महीने पहले 9 दिसम्बर 2021 को जाकिया जाफरी की याचिका पर मैराथन सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। गुजरात दंगों की जांच के लिए बनी एसआईटी ने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे अब के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को क्लीन चिट दी थी।

एहसान जाफरी की दंगों में हुई थी मौत

2002 में गुजरात दंगों के दौरान जाकिया जाफरी के पति तब कांग्रेस से विधायक रहे एहसान जाफरी को दंगाई भीड़ ने मार डाला था। गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में एहसान जाफरी भी मारे गए थे। एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने एसआईटी की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी।

एसआईटी की रिपोर्ट में प्रदेश के उच्च पदों पर रहे लोगों को क्लीन चिट दी गई थी। एसआईटी ने राज्य के उच्च पदाधिकारियों की ओर से गोधरा ट्रेन अग्निकांड और उसके बाद हुए दंगे भड़काने में किसी भी साजिश को नकार दिया था। साल 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जाकिया की शिकायत खारिज कर दी थी।

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