महिला आईएएस की जिद नहीं चली, सरकार ने ठुकराई अर्जी, लौटना पड़ा राजस्थान तो हुई यह कार्रवाई
एनसीआई@जयपुर
राजस्थान केडर की महिला आईएएस अधिकारी पूनम सात साल पहले डेपुटेशन पर अपने गृह राज्य बिहार में गईं थीं। वह अपना डेपुटेशन पीरियड पूरा हो जाने के बावजूद भी राजस्थान लौटना नहीं चाह रहीं थीं। नियम विरुद्ध अपना केडर राजस्थान से बदलवा कर बिहार करवाने के लिए उन्होंने बहुत जतन किए, मगर सब असफल साबित हुए। केन्द्र सरकार सहित राजस्थान व बिहार सरकार ने भी उनकी इस अर्जी को ठुकरा दिया। अब आखिरकार उन्हें राजस्थान लौटना पड़ा।
आईएस पूनम के यहां लौटते ही राज्य के कार्मिक विभाग ने उन्हें एपीओ (अवेटिंग फॉर पोस्टिंग ऑर्डर) कर दिया। सूत्रों के अनुसार सरकार अब उनके खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई भी करने जा रही है।
राजस्थान ही नहीं देश की ब्यूरोक्रेसी के इतिहास का यह अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है। आईएएस पूनम साल 2005 बैच की अफसर हैं। अक्टूबर 2016 से वह बिहार में डेपुटेशन पर गई थीं। वे अपना डेपुटेशन पीरियड पूरा होने के बाद भी राजस्थान नहीं लौट रही थीं।
इस बीच उन्होंने केन्द्र, बिहार और राजस्थान सरकार से उनका केडर राजस्थान से बदलकर स्थायी रूप से बिहार कर देने की अर्जी लगा दी। वे मूलत: बिहार की रहने वाली हैं।
मूलत: राजस्थान केडर की आईएएस पूनम अपने गृह प्रदेश बिहार के केडर में ही नियुक्ति चाहती थीं, जबकि भारत सरकार या सम्बन्धित प्रदेश राजस्थान व बिहार के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। पूनम ने खुद को बिहार केडर अलॉट करने के लिए केन्द्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण मंत्रालय और राजस्थान के कार्मिक विभाग को आवेदन किया था। हालांकि यह आवेदन पूर्णतया नियम विरुद्ध था।
ऐसा रहा आईएएस पूनम का साढ़े छह साल का सफर
आईएएस पूनम साल 2016 में डेपुटेशन पर बिहार चली गईं थीं। उन्हें यह डेपुटेशन 3 साल के लिए मिला था। इस हिसाब से वह अक्टूबर 2016 से सितम्बर 2019 तक वहां रह सकती थीं। उसके बाद उन्होंने कोरोना महामारी का हवाला देकर एक साल के लिए अपना डेपुटेशन बढ़वा लिया।
केन्द्र, राजस्थान व बिहार की सरकारों ने उन्हें विशेष परिस्थितियां देखते हुए यह इजाजत दे दी। फिर उनका कार्यकाल (डेपुटेशन) अक्टूबर 2020 में पूरा हो गया। इसके बाद उन्होंने फिर से कोरोना का हवाला देकर एक साल का डेपुटेशन और मांगा, लेकिन नहीं मिला। तब उन्होंने कैट (प्राधिकरण) में शरण ली, जिसके बाद उन्हें फिर एक साल का डेपुटेशन कैट के माध्यम से मिल गया, लेकिन यह डेपुटेशन भी अक्टूबर 2021 में खत्म हो गया था।
पूनम अब तक बिहार में ही थीं। उन्होंने अपना परिवार भी पटना (बिहार) ही शिफ्ट कर लिया था। वे बिहार के सारण शहर में कमिश्नर के पद पर कार्यरत थीं।
पूनम राजस्थान में बीकानेर, सवाई माधोपुर, डूंगरपुर और बूंदी जिलों में कलक्टर रह चुकी हैं। राजस्थान के कार्मिक विभाग ने पूनम को पत्र लिखकर उनके अब तक केडर में वापस नहीं लौटने का कारण पूछा था, जिसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया।
कार्मिक विभाग ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला कर केन्द्र के कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग और बिहार राज्य सरकार को अपनी आपत्ति भी दर्ज करवाई। विभाग के मंत्री होने के नाते इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी दी गई थी। कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमंत गेरा ने इस सम्बन्ध में पूरा प्रकरण विस्तार से तैयार किया।
डॉ. जितेन्द्र सिंह केन्द्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण मंत्री हैं। यह मंत्रालय सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट करता है। केडर सम्बन्धी नियम पूरे देश में यही मंत्रालय तय करता है।
अधिकतम 5 साल रह सकते होम स्टेट में
भारत सरकार के स्पष्ट नियम हैं कि कोई भी आईएएस या आईपीएस अफसर अपने सर्विस केडर से होम स्टेट जा सकता है, लेकिन ऐसा पूरी सर्विस के दौरान कुल मिलाकर अधिकतम 5 साल के लिए ही हो सकता है। यह अलग-अलग अवधि (जैसे एक बार दो साल और एक बार तीन साल या एक-एक साल) में भी सम्भव है और लगातार एक साथ 5 साल तक भी।
इससे ज्यादा अवधि का कोई मामला पूरे देश में सामने नहीं आया है, जिसमें किसी आईएएस अफसर ने अपने ड्यूटी केडर से होम स्टेट के केडर में 5 साल से ज्यादा समय व्यतीत किया हो।
तय समय से ज्यादा कोई नहीं रुकता
राजस्थान केडर से हाल के सालों में फरवरी-19 से फरवरी-22 तक डॉ. रवि सुरपुर अपने होम स्टेट कर्नाटक में रहकर वापस आए हैं। उससे पहले साल 2009 में तमिलनाडु केडर से हरसहाय मीणा अपने होम स्टेट राजस्थान में 3 साल रहकर वापस गए हैं।
साल 2015 आईएएस परीक्षा के टॉपर रहे अतहर आमिर खान भी फरवरी-2021 से अपने होम स्टेट कश्मीर गए हुए हैं। इसी नियम के तहत पूनम भी बिहार गई थीं।
युद्ध, भूकम्प, आतंकवाद जैसी स्थितियों में भी नहीं बदला जाता केडर
आईएएस-आईपीएस देश की ऐसी सेवाएं हैं, जिनके तहत जिस अफसर को जो भी स्टेट केडर आवंटित होता है, उन्हें उसी स्टेट केडर में सर्विस पूरी करनी पड़ती है। किसी दुश्मन देश के साथ युद्ध होने, भूकम्प आने या आतंकवाद जैसी स्थितियों में भी केडर स्टेट में बदलाव नहीं होता है।
ब्यूरोक्रेसी के जानकारों का कहना है कि 1980-85 से पहले कुछ स्तर के प्रावधान थे, जब युद्ध, आतंकवाद जैसी विषम परिस्थितियों में कुछ अफसरों का केडर बदला गया हो। उसमें भी संसदीय समिति, राज्य सरकारों की अनुमति, प्रधानमंत्री की मंजूरी आदि होना जरूरी होता था, लेकिन बीते 30-35 सालों में यह प्रावधान भी खत्म हो गए हैं।
पति-पत्नी के केडर के आधार पर बदला जाता है केडर
आईएएस-आईपीएस की सेवा में पति-पत्नी अगर दोनों अफसर हों, तो उन्हें यह सुविधा दी जाती है कि वे दोनों एक ही स्टेट केडर में स्थायी रूप से बदलाव करवा सकते हैं, लेकिन इसमें भी होम स्टेट केडर नहीं दिया जाता है।
जैसे किसी आईएएस अफसर को राजस्थान केडर अलॉट हुआ है और उनकी पत्नी को महाराष्ट्र केडर। ऐसे में पति को महाराष्ट्र या पत्नी को राजस्थान केडर अलॉट किया जा सकता है, लेकिन अगर उनका होम स्टेट क्रमश: महाराष्ट्र व राजस्थान है तो फिर यह अलॉटमेंट भी नहीं हो सकता। यह नियम सभी आईएएस-आईपीएस अफसरों की जानकारी में है। इसके बावजूद आईएएस पूनम की इस तरह की मांग को ब्यूरोक्रेसी में बचकाने व्यवहार के रूप में देखा जा रहा है।
एक आईएएस गए थे अमेरिका, कभी वापस नहीं लौटे राजस्थान
राजस्थान में साल 2010-2012 के बीच एक और चर्चित मामला हुआ था, तब कर्नाटक के मूल निवासी बी. शरण नामक एक आईएएस अफसर एक शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम में अमेरिका गए थे। वे उसके बाद से आज तक वापस राजस्थान नहीं लौटे।
केन्द्र सरकार व राजस्थान सरकार के स्तर पर कई बार नोटिस देने और पत्र व्यवहार करने के बावजूद वे नहीं लौटे। आखिरकार भारत सरकार ने उन्हें सेवा से हटा दिया था। आईएएस पूनम भी अगर राजस्थान नहीं लौटतीं तो उन पर भी सम्भवतया यही कार्रवाई की जाती। आम तौर पर कोई आईएएस अफसर विदेश जाते हैं, तो वे सरकार से स्टडी लीव लेकर वहां किसी संस्थान में अध्ययनरत होने का प्रमाण पत्र जमा करवा कर जाते हैं। जैसे इन दिनों आरुषि मलिक, इंद्रजीत सिंह, राजन विशाल आदि अफसर गए हुए हैं। स्टडी लीव के लिए 2 से 3 वर्ष तक का समय मिलता है।
आईएएस अम्बरीश गए हुए हैं प्राइवेट सेक्टर में
आमतौर पर कोई साधारण सरकारी डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, कर्मचारी आदि सरकारी तंत्र में नौकरी करते हुए प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी या डेपुटेशन पर नहीं जा सकते हैं, लेकिन आईएएस अफसरों को कानूनन यह छूट मिली हुई है।

राजस्थान केडर के एक आईएएस अफसर हैं अम्बरीश कुमार। वे जुलाई-2020 से ईशा आउटरीच कोयम्बटूर (तमिलनाडु) में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। यह ईशा आउटरीच मशहूर दार्शनिक और संत जग्गी वासुदेव की संस्था है। आईएएस अम्बरीश का मामला भी इन दिनों राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ राजस्थान केडर में 100 से अधिक आईएएस के पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में प्राइवेट क्षेत्र में जाने की इजाजत किसी आईएएस को मिलना अजीब माना जा रहा है।
पूरे देश में खराब उदाहरण होता
राजस्थान केडर में अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से रिटायर्ड हुए आईएएस अफसर रवि श्रीवास्तव और एके सिंह ने बताया कि अगर किसी आईएएस अफसर की इस तरह की मांग मान ली जाए तो देश का प्रशासनिक ताना-बाना और शीर्ष प्रशासनिक सेवा की गरिमा व पवित्रता ही नष्ट होने का खतरा हो जाएगा। केन्द्र, राजस्थान व बिहार सरकार ने ठीक कदम उठाया है। आईएएस की सेवा कोई राजनीतिक पद या कोई निजी व्यवसाय नहीं है कि कोई कहीं पर भी अपने हिसाब से नौकरी कर ले।
अगर इस मांग को केन्द्र सरकार, राजस्थान सरकार और बिहार सरकार ने पूरा कर दिया (जो कि नियमों के तहत असम्भव है) होता तो राजस्थान केडर के 245 आईएएस अफसरों में से 185 आईएएस अफसर अपने-अपने होम केडर (गृह प्रदेश) में चले जाते। ऐसा होने पर आईएएस-आईपीएस जैसी सेवाओं के लिए बीते 75 वर्षों में जो केडर सिस्टम तैयार किया गया है, वो खत्म हो सकता था।
