एसई कार्यालय पर पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज, चोट लगने से रुपेश शर्मा को अस्पताल में कराया भर्ती, किसानों का धरना-प्रदर्शन खत्म(वीडियो)
विद्युत निगम के चीफ इंजीनियर गजानंद वर्मा ने मान ली थी सभी मांगें, मगर किसान नहीं हुए संतुष्ट
एनसीआई@बूंदी
भाजपा नेता रुपेश शर्मा के नेतृत्व में विद्युत निगम के एसई कार्यालय के बाहर किए जा रहे धरना-प्रदर्शन के दौरान कुछ उग्र किसानों ने कार्यालय पर पत्थर फेंके। साथ ही खराब बल्ब और ट्यूबलाइटों को भी सड़क पर फोड़ा। इससे कुछ पुलिस कर्मियों के साथ किसानों को भी चोटें आईं। एक किसान की ट्यूबलाइट तो जोर से अन्य किसान को जा लगी।
उग्र होते इन हालातों को देखते हुए भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस एक्शन में आई और हल्का लाठी चार्ज किया। इससे वहां अफरा तफरी के हालात बन गए। भाग दौड़ मच गई। इसी बीच पुलिस ने रुपेश शर्मा को अपनी ओर खींच लिया। इस खींचतान में रुपेश नीचे गिर गए और बेहोशी की हालत में हो गए। इसके बाद पुलिस उन्हें जीप में डाल कर अस्पताल ले गई। इसी के साथ किसानों का यह धरना प्रदर्शन खत्म हो गया। इसमें काफी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी शामिल रहीं। आंदोलनकारी के हाथों में मांगें लिखी हुई तख्तियां थीं। महिलाएं हाथों में चूड़ियां भी लिए हुए थीं।
चीफ इंजीनियर ने मान ली थी मांगें, फिर भी किसान नहीं हुए शांत
यहां गौरतलब है कि विद्युत निगम के एडिशनल चीफ इंजीनियर गजेन्द्र वर्मा ने कोटा से आकर रुपेश शर्मा से वार्ता कर उनकी सभी मांगों पर सहमति जाता दी थी। मगर रुपेश शर्मा और किसान यह बात लिख कर दिए जाने पर अड़ गए। उपखंड अधिकारी सोहन लाल चौधरी ने आंदोलनकारियों को समझाने की कोशिश की, मगर किसान सहमत नहीं हुए। इस दौरान किसानों ने बूंदी-चित्तौड़ रोड पर जाम लगाया हुआ था। इससे लोगों को दूसरी ओर से घूम कर आना जाना पड़ रहा था।
यह है मामला
उल्लेखनीय है कि रुपेश शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही विद्युत कटौती के खिलाफ एवं जले हुए ट्रांसफार्मरों को तुरंत बदले जाने की मांग को लेकर 11 पंचायतों के किसानों के साथ आज सोमवार को विद्युत निगम के एसई कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी थी।
इसके तहत किसान सुबह से ही चित्तौड़ रोड स्थित विद्युत निगम के एसई कार्यालय पर पहुंचना शुरू हो गए थे। आंदोलन के लिए रुपेश शर्मा की ओर से एसई कार्यालय के पास स्टेज बनाया गया था। यहां एकत्र हुए किसान किसान अनवरत बिजली और ट्रांसफार्मर दिए जाने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। वे गहलोत सरकार के खिलाफ भी नारे लगा रहे थे।
आंदोलनकारी किसान मौके पर जले हुए दो ट्रांसफार्मर भी लेकर आए थे, जिन्हें शिकायत के बावजूद भी विद्युत निगम ने नहीं बदला था। इसके अलावा इस आंदोलन में शामिल कुछ किसान गले में खराब बल्बों की माला पहन कर आए थे तो कुछ के हाथ में ट्यूबलाइटें भी थीं।

बनते बनते बिगड़ी बात
जब किसान काफी संख्या में मौके पर एकत्र हो गए और स्टेज से वक्ताओं के भाषण होने लगे। हनुमान चालीसा का पाठ किया जाने लगा। इसके बाद आंदोलनकारियों की मांग पर एसई जगदीश प्रसाद बैरवा वार्ता के लिए कार्यालय के गेट के बाहर आए। यहां उनकी और रुपेश शर्मा की बातचीत शुरू ही हुई थी कि इसी बीच आंदोलन में शामिल कुछ महिलाओं ने बैरवा की ओर चूड़ियां फेंक दीं। इससे रंग में भंग पड़ गया और बैरवा वापस ऑफिस के अंदर चले गए।
इस दौरान वहां सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात महिला थाने के एसएचओ संजय वर्मा को टूटी हुई चूड़ी का एक टुकड़ा लग गया। इससे उन्हें चोट आई। इस घटनाक्रम के बाद वापस स्टेज से भाषण होने लगे। किसानों की नारेबाजी जारी रही। इसके बाद कोटा से एडिशनल चीफ इंजीनियर गजेन्द्र वर्मा मौके पर पहुंच गए। उन्होंने रुपेश शर्मा से बात करके कुछ उतार-चढ़ाव के साथ उनकी सभी मांगों पर सहमति जाता दी। मगर रुपेश शर्मा और किसान यह सहमति स्टाम्प पेपर पर लिखकर दिए जाने की मांग पर अड़ गए। इस पर वर्मा वापस ऑफिस के अंदर चले गए।
ऐसे आई लाठी चार्ज की नौबत
बाद में इस प्रदर्शन के दौरान कुछ उग्र किसानों ने कार्यालय पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। बल्ब और ट्यूबलाइट सड़क पर फोड़ने लगे। इससे कई पुलिसकर्मियों और किसानों को चोटें आईं। इस पर पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए हल्का लाठी चार्ज किया। साथ ही पुलिस ने रुपेश शर्मा को खींच लिया। इससे वह तकरीबन बेहोशी की हालत में हो गए। इसके बाद पुलिस रुपेश शर्मा को जीप में डाल कर अस्पताल ले गई। बताया गया है कि लाठीचार्ज से रुपेश को हल्की चोट आई है। इससे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं लाठी चार्ज के बाद किसानों ने भी अपने गांवों की ओर लौटना शुरू कर दिया था।
पुलिस प्रशासन ने एहतियातन एसई ऑफिस के आगे तगड़ी बेरिकेडिंग कर दी थी, जिससे किसान ऑफिस के भीतर नहीं घुस सकें। साथ ही काफी संख्या में पुलिस के जवान भी मौके पर तैनात थे।
आंदोलनकारियों की ये थी मांगें
यह आंदोलन लगातार बिजली दिए जाने व शिकायत के बाद 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदले जाने की मांग को लेकर किया गया था। एडिशनल चीफ इंजीनियर गजेन्द्र वर्मा से वार्ता के दौरान कुछ किसानों ने यह आरोप भी लगाया कि विद्युत कर्मी जायज काम के लिए पैसे की मांग करते हैं। इस पर वर्मा ने कहा कि आप ऐसे कर्मचारियों का नाम बताएंगे तब ही कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि किसानों की ओर से ऐसा कोई नाम नहीं बताया गया।
बीजेपी का अन्य कोई बड़ा चेहरा नहीं हुआ शामिल
भाजपा नेता रुपेश शर्मा के इस आंदोलन की खास बात यह रही कि इसमें किसने की संख्या तो अच्छी खासी रही, मगर पार्टी का अन्य कोई भी जाना पहचाना चेहरा इस आंदोलन में शामिल नहीं था। इसे हमेशा की तरह पार्टी में गुटबाजी के रूप में देखा जा रहा है।
