‘सनातन का श्राप ले डूबा’, कांग्रेस की तगड़ी हार पर वरिष्ठ कांग्रेसी आचार्य प्रमोद कृष्णम की यह है प्रतिक्रिया, लोगों ने भी इस पर दिया जमकर जवाब
आचार्य प्रमोद ने कहा-भारत भावनाओं का देश है, सनातन का विरोध हमें ले डूबा
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में से तीन के नतीजे कल यानी रविवार को ही सामने आ गए थे। इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ शामिल रहे। वहीं मिजोरम की मतगणना आज हो रही है। इससे पहले कल जब तीनों राज्यों में बीजेपी बढ़त बनाती दिख रही थी, तभी प्रियंका गांधी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में जाने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने X हेंडल पर पार्टी को आइना दिखाने वाला संदेश पोस्ट कर कांग्रेसियों के चेहरों पर नजर आ रही मायूसी को और बढ़ा दिया। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इशारों-इशारों में अपनी ही पार्टी पर तंज कसा।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने लिखा- ‘सनातन का श्राप ले डूबा।’ आचार्य प्रमोद ने इसके बाद मीडिया को दिए बयानों में कहा- ‘कांग्रेस को सनातन विरोधी के तौर पर भी जाना जाने लगा है। कांग्रेस ने अगर सनातन विरोधी नेताओं को पार्टी से नहीं निकला तो इसकी हालत भी AIMIM जैसी हो जाएगी। भारत भावनाओं का देश है, सनातन का विरोध हमें ले डूबा।’
आचार्य प्रमोद ने यह भी कहा- ‘जातिवादी राजनीति और सनातन का विरोध हमें ले डूबा। जिन राज्यों में कांग्रेस हार रही है, अगर उनमें शर्म है तो वहां के प्रभारी को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।’ आचार्य प्रमोद का यह ट्वीट और बयान सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हुआ तो इस पर बड़ी संख्या में लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
एक यूजर ने लिखा, ‘कभी-कभी आप इतना सच क्यों बोल देते हो आचार्य जी?’ आनंद शेखर झा ने लिखा, ‘बिलकुल सही बात, हिन्दुस्तान में रहकर सनातन को नीचा दिखाना महंगा पड़ गया..!!’ सचिन शर्मा ने लिखा, ‘बिल्कुल सही कहा आपने आचार्य जी , जो सनातन को मिटाने की कोशिश करेगा, वह खुद मिट जाएगा।’ आदित्य आनंद ने लिखा, ‘आप भी उसी नाव पर बैठे हैं और कुछ नहीं कर रहे, कहीं न कहीं आप भी जिम्मेदार हैं।’
एक ने लिखा, ‘कांग्रेस और उसके नेताओं ने प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया, इससे जनता एकजुट हो गई।’ विपिन पटेल ने लिखा, ‘अच्छा जी आ गए अपनी असली रूप में, टाइम देख कर रंग बदलते हो।’ एसपी शर्मा ने लिखा, ‘यही होता है, जब आप हिन्दू के मुद्दे को कार्ड और अल्पसंख्यक की तुष्टिकरण को गारंटी कहते हैं।’
