कांग्रेस के धुरंधर राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा, खड़गे को लिखी लम्बी-चौड़ी चिट्ठी में पार्टी को दिखाया आईना, राहुल गांधी पर किए हमले
लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक के बाद एक झटके लगते जा रहे हैं। कांग्रेस के सीनियर नेता और प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है उन्होंने बकायदा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर पार्टी छोड़ने के कारण भी बताए हैं।
एनसीआई@नई दिल्ली
कांग्रेस के सीनियर नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में अपना इस्तीफा पोस्ट करते हुए पार्टी छोड़ने के कारण भी बताए हैं। उन्होंने कहा है कि वह सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकते हैं और ना ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकते हैं। इसलिए वह कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने जाति जनगणना के मसले पर भी सवाल उठाया है। वेल्थ क्रिएटर कहकर अडानी-अम्बानी जैसे उद्योगपतियों को दिन रात गाली देते रहने को भी गलत बताया है। यह सब सीधा-सीधा राहुल गांधी पर हमला है।
कांग्रेस पार्टी आज जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है,उसमें मैं ख़ुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा.मैं ना तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और ना ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकता.इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहाहूं pic.twitter.com/Xp9nFO80I6
— Prof. Gourav Vallabh (@GouravVallabh) April 4, 2024
उल्लेखनीय है कि गौरव वल्लभ राजस्थान के उदयपुर और झारखंड के जमशेदपुर से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, दोनों ही जगहों से उन्हें हार का मुंह देखने को मिला था। वे चार्टर्ड अकाउंटेंट और इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के साथ उनका एक डिबेट काफी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने पात्रा से पूछा था कि एक ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं।
गौरव वल्लभ ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र में कहा,’भावुक हूं। मन व्यथित है। काफी कुछ कहना चाहता हूं, लिखना चाहता हूं, बताना चाहता हूं। लेकिन, मेरे संस्कार ऐसा कुछ भी कहने से मना करते हैं, जिससे दूसरों को कष्ट पहुंचे। फिर भी मैं आज अपनी बातों को आपके समक्ष रख रहा हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि सच को छुपाना भी अपराध है, और मैं अपराध का भागी नहीं बनना चाहता।’
पार्टी के स्टेड को लेकर थे असहज
गौरव वल्लभ ने आगे लिखा,’मैं वित्त का प्रोफेसर हूं। कांग्रेस पार्टी की सदस्यता हासिल करने के बाद पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया। कई मुद्दों पर पार्टी का पक्ष दमदार तरीके से देश की महान जनता के समक्ष रखा, लेकिन पिछले कुछ दिनों से पार्टी के स्ट्ड से असहज महसूस कर रहा हूं। जब मैंने कांग्रेस पार्टी ज्वॅइन की थी, तब मेरा मानना था कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है। जहां पर युवा, बौद्धिक लोगों की, उनके आइडिया की कद्र होती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुझे यह महसूस हुआ कि पार्टी का मौजूदा स्वरूप नए आइडिया वाले युवाओं के साथ खुद को एडजस्ट नहीं कर पाती।’
‘नेता को डायरेक्ट सुझाव नहीं दे सकते’
गौरव वल्लभ ने अपने पत्र में लिखा,’पार्टी का ग्राउंड लेवल कनेक्ट पूरी तरह से टूट चुका है, जो नए भारत की आकांक्षा को बिल्कुल भी नहीं समझ पा रही है। जिसके कारण न तो पार्टी सत्ता में आ पा रही और ना ही मजबूत विपक्ष की भूमिका ही निभा पा रही है। इससे मेरे जैसा कार्यकर्ता हतोत्साहित होता है। बड़े नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी पाटना बेहद कठिन है, जो कि राजनैतिक रूप से जरूरी है। जब तक एक कार्यकर्ता अपने नेता को डायरेक्ट सुझाव नहीं दे सकता, तब तक किसी भी प्रकार का सकारात्मक परिवर्तन सम्भव नहीं है। ‘
गौरव वल्लभ ने पत्र में यह भी लिखा
1. अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा में कांग्रेस पार्टी के स्टेड से मैं क्षुब्ध हूं। मैं जन्म से हिन्दू और कर्म से शिक्षक हूं। पार्टी के इस स्टेंड ने मुझे हमेशा असहज किया, परेशान किया। पार्टी और गठबंधन से जुड़े कई लोग सनातन के विरोध में बोलते हैं, और पार्टी का उस पर चुप रहना, उसे मौन स्वीकृति देने जैसा है।
2. इन दिनों पार्टी गलत दिशा में आगे बढ़ रही है। एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर सम्पूर्ण हिन्दू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं। यह कार्यशैली जनता के बीच पार्टी को एक खास धर्म विशेष के ही हिमायती होने का भ्रामक संदेश दे रही है। यह कांग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।
3. आर्थिक मामलों पर वर्तमान समय में कांग्रेस का स्टेंड हमेशा देश के वेल्थ क्रिएटर्स को नीचा दिखाने का, उन्हें गाली देने का रहा है। आज हम उन आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) नीतियों के खिलाफ हो गए हैं, जिसको देश में लागू कराने का पूरा श्रेय दुनिया ने हमें दिया है। देश में होने वाले हर विनिवेश पर पार्टी का नजरिया हमेशा नकारात्मक रहा। क्या हमारे देश में बिजनेस करके पैसा कमाना गलत है?
4. जब मैंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी, उस वक्त मेरा ध्येय सिर्फ यही था कि आर्थिक मामलों में अपनी योग्यता व क्षमता का देशहित में इस्तेमाल करूंगा। हम सत्ता में भले नहीं हैं, लेकिन अपने मैनीफेस्टो से लेकर अन्य जगहों पर देशहित में पार्टी की आर्थिक नीति-निर्धारण को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकते थे। लेकिन, पार्टी स्तर पर यह प्रयास नहीं किया गया, जो मेरे जैसे आर्थिक मामलों के जानकार व्यक्ति के लिए किसी घुटन से कम नहीं है।
5. पार्टी आज जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उसमें मैं खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा। मैं ना तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और ना ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर को गाली दे सकता हूं। इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहा हूं। व्यक्तिगत रूप से मैं आपसे मिले स्नेह के लिए हमेशा आभारी रहूंगा।


