April 22, 2026

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विधानसभा में गाली देने का मामला: धारीवाल ने माफी मांगी, दो दिन कार्यवाही में हिस्सा लेने पर रोक, स्पीकर ने कहा-वैसे तो चार साल सदस्य रहने का हक नहीं

विधानसभा में गाली देने का मामला: धारीवाल ने माफी मांगी, दो दिन कार्यवाही में हिस्सा लेने पर रोक,  स्पीकर ने कहा-वैसे तो चार साल सदस्य रहने का हक नहीं

एनसीआई@जयपुर

विधानसभा में यूडीएच की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान गाली देने के मामले में मंगलवार को शांति धारीवाल ने सदन में माफी मांगी। इसके बाद स्पीकर वासुदेव देवनानी ने व्यवस्था देते हुए धारीवाल को दो दिन सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेने की सजा दी है। साथ में यह भी कहा कि, हालांकि इन्हें 4 साल तक सदन का सदस्य रहने का हक नहीं है।

स्पीकर देवनानी ने धारीवाल से कहा- आज और कल आप विधानसभा तो आएंगे, लेकिन सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। मैं तो चाहता था जिस तरह का आचरण था, चार साल तक सदन के सदस्य रहने का हक नहीं था। आपके दल के सदस्यों के आग्रह और माफी के बाद मैंने फैसला किया।

स्पीकर ने कहा- जिस तरह का आचरण किया गया, इससे सदन की गरिमा को भारी ठेस पहुंची। आपको अंदाजा नहीं है, जब मीडिया में यह बात गई तो इस सदन की क्या गरिमा रह गई? इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आगे से चेतावनी है कि आप आचरण ठीक रखें। सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के किसी एक्शन को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने 26 जुलाई को यूडीएच की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान सभापति संदीप शर्मा को गालियां दी थीं।
कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने 26 जुलाई को यूडीएच की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान सभापति संदीप शर्मा को गालियां दी थीं।

जूली और डोटासरा ने मांगी माफी

इससे पहले धारीवाल के गाली देने पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सदन में माफी मांगी। सदन में धारीवाल के गाली के मामले में स्पीकर की व्यवस्था से पहले चर्चा हुई। डोटासरा और जूली ने स्पीकर से धारीवाल को माफ करने का आग्रह किया। जूली और डोटासरा ने कहा ​कि धारीवाल खुद खेद प्रकट कर देंगे, उन्हें माफ कर दिया जाना चाहिए।

डोटासरा बोले- धारीवाल के शब्दों को उचित नहीं ठहरा सकते

डोटासरा ने कहा- इनके (धारीवाल) मुंह से ऐसे शब्द कैसे निकले, उन शब्दों को जायज नहीं ठहरा सकते। अवस्था की वजह से निकले या कैसे निकले, हजारों बार असंसदीय शब्दों का प्रयोग होता है तो सभापति या अध्यक्ष कार्यवाही से निकाल देते हैं और मामला खत्म हो जाता है। संदीप शर्मा सभापति थे, उनके बारे में बात थी, वो कार्यवाही से निकाल देते तो मामला खत्म हो जाता।

राजेन्द्र पारीक जब सभाापति की कुर्सी पर थे, तो उन्होंने वे शब्द कार्यवाही से हटा दिए थे। स्पीकर ने व्यवस्था देने की बात कही, हम तो निवेदन कर रहे हैं। उन्होंने कहा- 29 जुलाई को मुख्यमंत्री जी रोहित बोहरा को सम्बोधित कर रहे थे, उनके मुंह से विवेक निकल गया, लेकिन उनकी मंशा खराब नहीं थी।

स्पीकर ने धारीवाल को 19 साल का बता दिया, उसका भी असर

डोटासरा ने कहा- स्पीकर साहब ने धारीवाल जी की उम्र 19 साल बता दी, उसका भी असर हुआ। मेरी धारीवाल साहब से बात हुई, इनके संदीप शर्मा से अच्छे रिश्ते हैं। जब सभापति की कुर्सी पर बैठे दिखे तो कुछ-कुछ शब्द निकल गए, वो शब्द गलत थे। हम सब लोग यह मानते हैं कि सदन चले, हम लोग माफी चाहते हैं, जानबूझकर नहीं किया। धारीवाल पांच बार चुनकर आए, ससंदीय कार्य मंत्री रहे, वो आदमी जानबूझकर ऐसा नहीं कर सकता। इन्होंने कोटा को चमकाने का काम किया। इस बात को यहीं समाप्त किया जाए।

सजा भी 19 साल के युवक जैसी दें क्या? यह कुतर्क है

मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि जब 19 साल के हैं तो सजा भी वैसी ही दी जाए। फिर तो इन्हें हाथ ऊपर करवाकर शाम तक खड़े कर दें, यह कुतर्क है। धारीवाल ने जिस तरह के शब्द सदन में बोले, वो गिरते स्तर का परिचायक है।

जो शब्द बोले, उसके लिए माफी चाहता हूं’

धारीवाल ने कहा- मैं 40 साल से जीतता आ रहा हूं, मैं हमेशा इस आसन को सर्वोच्च मानकर ही चला हूं। मेरा आसन का अपमान करने का कोई इरादा नहीं हैं। संदीप शर्मा जब पहली बार सभापति की कुर्सी पर बैठे तो इस पूरे सदन में अकेला आदमी था, जिसने कहा था, आज सबसे ज्यादा खुश हूं कि ये विराजमान हैं। जहां तक संदीप शर्मा की बात है तो वो मेरे बेटे के दोस्त हैं। हमेशा हंसी मजाक चलती रहती है। जब भी मिलते हैं, हल्की-फुल्की बातें करते हैं।

गायब अफसरों पर होगी कार्रवाई

स्पीकर वासुदेव देवनानी ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नदारद रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब से कार्यवाही करने की बात कही। देवनानी ने इन अधिकारियों के मौजूद नहीं रहने पर नाराजगी जताते हुए इनकी लिस्ट मांगी है। उन्होंने विधायकों के सवाल वापस लेने पर भी नाराजगी जताई। स्पीकर देवनानी ने कहा कि जब सवाल वापस लेना होता है तो लगाते ही क्यों हो? इस बार पक्ष-विपक्ष के 7-8 विधायकों के सवाल वापस लेने के प्रस्ताव आए हैं। आगे से सवाल वापस लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गौवंश के चारे की सहायता राशि बढ़ाने की मांग की। जूली ने कहा कि दो और चार रुपए में इस महंगाई के दौर में कितना चारा आएगा? इस पर गोपालन मंत्री ने जोराराम कुमावत ने दोहे में जवाब देते हुए कहा कि धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।

ब्लेकमैल करने के लिए लगाते हैं सवाल

इससे पहले विधानसभा में कांग्रेस विधायक के बांसवाड़ा में पंचायतीराज कर्मचारियों के तबादलों से जुड़े सवाल पूछने पर विवाद हो गया। मंत्री दिलावर ने कांग्रेस विधायक के लिए कहा कि ये किसी को ब्लेकमैल करने के लिए सवाल लगाते हैं। मंत्री की टिप्पणी से नाराज कांग्रेस विधायकों ने हंगामा कर दिया।

मैं धारीवाल को आदर्श मानता था

बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने धारीवाल पर कार्रवाई की मांग की। कृपलानी ने कहा कि मैं धारीवाल को आदर्श मानता था, लेकिन यहां पर इनके लक्षण देखें, जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल होता है, अगर मुझे पता होता तो मैं चुनाव ही नहीं लड़ता। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

कृपलानी ने कहा कि धारीवाल का राहुल, खड़गे ने टिकट काट दिया था, लेकिन गहलोत साहब कैसे टिकट ले आए। राजस्थान की गरिमा को बरकरार रखना है तो मां-बहन की गालियां देने पर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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