कथा में आचार्य ने शिव-पार्वती प्रसंग सुनाने के बाद दाम्पत्य जीवन का महत्व बताया
एनसीआई@बूंदी
वैद्यनाथ ( रेतवाली ) महादेव मंदिर प्रांगण में चल रही श्री शिव महापुराण के छठे दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य ऋतुराज शर्मा ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के बाद दाम्पत्य जीवन का महत्व बताया।
इसमें आचार्य शर्मा ने कहा कि विवाह सनातन सस्कृति में पन्द्रहवां संस्कार है। इसे पूर्ण वैदिक रीति रिवाज से सम्पन्न करना चाहिए। दाम्पत्य जीवन में स्त्री पुरुष के अधिकार के महत्व को प्रतिपादित करने के लिए ही भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर का रूप धारण किया और संसार को स्त्री पुरुष एक समान होने की शिक्षा दी।
इसके बाद कथा व्यास ने कार्तिकेय जन्म, भगवान गणेश जन्म व उनके विवाह की कथा भी सुनाई।
भगवान गणेश का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि गणेश के कान बड़े हैं। राजा ( शासक ) के कान बड़े ही होना चाहिएं, जिससे प्रजा ही हर बात राजा तक पहुंच सके। ऐसे ही गणेश भगवान की आंखें छोटी होती हैं अर्थात राजा की आंखें सूक्ष्म होना चाहिएं, ताकि वह राज्य ही प्रत्येक गतिविधियों को ठीक से देख सके।
भगवान गणेश के वाहन का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि चूहा उद्यम का प्रतीक है। जब तक देश के लोग उद्यम करेंगे तब तक देश निरंतर गति करेगा।
कथा व्यास ने आगे जालंधर, शंखचूड़ , अंधकासुर आदि राक्षकों के वध की कथा सुनाई।
इस कथा में जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी भी शामिल हुए। उन्होंने ने वैद्यनाथ महादेव के दर्शन किए व कथा व्यास का स्वागत किया। व्यासपीठ द्वारा जिला कलक्टर डॉ. गोस्वामी को दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया गया।
इस दौरान जिला कलक्टर ने अपने उद्बोधन में कहा कि छोटी काशी बूंदी में इस तरह के आयोजन होते रहते हैं। उन्होंने बेहतरीन बूंदी की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना की कि सभी की कामना पूरी हो। इसके बाद आरती हुई। इसमें ज्योति शंकर शर्मा पुराणाचार्य, बूंदी के पूर्व राजपरिवार के सदस्य वंशवर्धन सिंह हाड़ा, सत्यनारायण सोमानी, पुरुषोत्तम लाल पारीक, प्रमोद गर्ग, रामस्वरूप धगाल, कालू कटारा, प्रदीप कुमावत, राधेश्याम मेवाड़ा, लाखन नायक, केसी वर्मा आदि ने भाग लिया एवं प्रसाद वितरण किया।
