हर माह 9, 18 एवं 27 को पीएमएसएमए दिवस पर लगाया जा रहा एफसीएम, नैनवां, तालेड़ा एवं हिंडोली ब्लॉक रहे सबसे आगे
एनसीआई@बूंदी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम एवं सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए बूंदी जिले में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। जिले में अब तक 6 हजार 470 एएनसी (ANC) पंजीकरण किए गए हैं। इनमें 5 से 9 ग्राम हीमोग्लोबिन वाली 3 हजार 26 एनीमिक गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा एनीमिक गर्भवतियों की समय-समय पर हीमोग्लोबिन जांच, आवश्यक प्रयोगशाला जांच, चिकित्सकीय परामर्श एवं नियमित फॉलोअप किया जा रहा है। एएनएम, आशा सहयोगिनी एवं चिकित्सा अधिकारियों की टीम द्वारा चिह्नित गर्भवतियों की नियमित निगरानी कर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों को कम किया जा सके।
एनीमिक गर्भवती महिलाओं को लगाए जा रहे एफसीएम इंजेक्शन
हर माह 9, 18 एवं 27 तारीख को आयोजित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) दिवस पर पात्र एनीमिक गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में एफसीएम इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। यह उपचार प्रसव के दौरान रक्त की कमी से होने वाले जोखिम को कम करने में प्रभावी साबित हो रहा है तथा अनेक गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हुआ है।

जिले में नैनवां, तालेड़ा एवं हिंडोली ब्लॉक में सर्वाधिक एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए हैं। इन ब्लॉकों में स्वास्थ्य टीमों द्वारा घर-घर सम्पर्क कर पात्र गर्भवतियों की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे अभियान को उल्लेखनीय सफलता मिली है।
सीएमएचओ डॉ. सामर ने यह दी विशेष जानकारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. ओपी सामर ने बताया कि फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) इंजेक्शन गर्भावस्था में होने वाले मध्यम एवं गम्भीर एनीमिया के उपचार का प्रभावी माध्यम है। इससे शरीर में आयरन की कमी तेजी से पूरी होती है तथा हीमोग्लोबिन स्तर में अपेक्षाकृत शीघ्र सुधार होता है। इंजेक्शन से गर्भवती महिलाओं में कमजोरी, थकान, चक्कर आने जैसी समस्याओं में कमी आती है तथा प्रसव के दौरान रक्त की कमी से होने वाले जोखिम भी घटते हैं। इसके साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास, कम वजन के शिशु के जन्म की संभावना में कमी तथा सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिलता है।

डॉ. सामर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य प्रत्येक पात्र एनीमिक गर्भवती महिला को समय पर एफसीएम उपचार उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी चिकित्सा संस्थानों, एएनएम एवं आशा सहयोगिनियों को नियमित स्क्रीनिंग, फॉलोअप एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में निरंतर सुधार लाया जा सके। उन्होंने बताया कि जिले में एफसीएम अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और भविष्य में भी प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक यह सुविधा पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास जारी रहेंगे।
सफलता की कहानी
जिले मे धर्मा पत्नी राकेश जाति कालबेलिया, निवासी घाट का बराना का एएनसी पर हीमोग्लोबिन 7.3 ग्राम से कम था। सीएचसी देईखेड़ा पर एफसीएम लगने के बाद 9.5 ग्राम हो गया और अभी वो चिकित्सकीय टीम की देखरेख में है। प्रसव सखी धर्मा का पूरा ध्यान रख रही है और सुरक्षित प्रसव की पूरी तैयारी टीम ने कर रखी है। जिले में धर्मा जैसी चिह्नित अन्य गर्भवती महिलाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
