राजस्थान के 32 निकायों में अध्यक्ष पद का चुनाव पहले ही निर्विरोध हो चुका था, अब तक घोषित परिणामों के बाद भाजपा सबसे ज्यादा अध्यक्ष पदों के साथ आगे है
एनसीआई@जयपुर
राजस्थान निकाय चुनाव के बाद सोमवार को मेयर और चेयरमैन के चुनाव में कई जगह ऐसे नतीजे सामने आए, जिन्होंने सियासी समीकरणों को चौंका दिया। प्रदेश की 301 निकायों में अध्यक्ष पद के नतीजे घोषित हो चुके हैं। इनमें भाजपा ने 197 पदों पर कब्जा जमाया है, जबकि कांग्रेस के खाते में 94 अध्यक्ष पद आए हैं। निर्दलीयों ने 7 निकायों में जीत दर्ज की। वहीं आम आदमी पार्टी, सीपीएम और आरएलपी को भी एक-एक निकाय में अध्यक्ष बनाने में सफलता मिली।
7 में से 6 नगर निगमों में बीजेपी का मेयर
नगर निगमों के नतीजों की बात करें तो भाजपा ने 7 में से 6 नगर निगमों में अपना मेयर बनाने में कामयाबी हासिल की। कांग्रेस को सिर्फ बीकानेर नगर निगम में सफलता मिली। अजमेर, पाली, उदयपुर और अलवर में भाजपा के उम्मीदवारों ने मेयर पद पर जीत दर्ज की। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा के मेयर निर्विरोध चुने जा चुके थे। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के मेयर का चुनाव 25 सितम्बर को होना है।
सबसे बड़ा उलटफेर अजमेर में, 32 पार्षद फिर भी 43 वोट
अजमेर का नतीजा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यहां कांग्रेस के 37 पार्षद थे, जबकि भाजपा के पास 32 पार्षद थे। इसके बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा मेयर बन गईं। अनामिका शर्मा को चुनाव में 43 वोट मिले। यानी भाजपा के अपने पार्षदों की संख्या से उन्हें 11 वोट ज्यादा मिले। कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। यह नतीजा बताता है कि मेयर चुनाव में पार्टी के पार्षदों के अलावा निर्दलीय और दूसरे समीकरण कितने अहम साबित हुए।
पाली में भी कांग्रेस के ज्यादा पार्षद, फिर भी बीजेपी की जीत
पाली में भी अजमेर जैसा ही उलटफेर देखने को मिला। यहां भाजपा के सिर्फ 21 पार्षद जीते थे, जबकि कांग्रेस के 29 पार्षद थे। इसके बावजूद भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर चुनी गईं, उन्हें 33 वोट मिले। कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट मिले, जबकि निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले। नमिता बुबकिया ने महज 4 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
बीकानेर में कांग्रेस ने बचाई लाज
सात नगर निगमों में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी राहत बीकानेर से आई। यहां कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला मेयर चुने गए। अनिल कल्ला को 50 वोट मिले, जबकि भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। इस तरह कांग्रेस ने 20 वोट के अंतर से जीत दर्ज कर प्रदेश के सात नगर निगमों में अपना एकमात्र मेयर बनाया।
उदयपुर में पारस सिंघवी, अलवर में सुमनलता
उदयपुर नगर निगम में भाजपा के पारस सिंघवी ने मेयर पद पर जीत दर्ज की। उन्हें 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले। इस प्रकार सिंघवी ने 30 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल मेयर बनीं। उन्हें 42 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले।
शिक्षा मंत्री के भाई को 3 वोट से हार
बारां जिले की अटरू नगर पालिका का नतीजा भी चर्चा में रहा। यहां शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर को कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने तीन वोट से हरा दिया। मंत्री के भाई की हार ने इस चुनाव को प्रदेश के चर्चित नतीजों में शामिल कर दिया।
32 निकायों में निर्विरोध निर्वाचन
इनसे पहले ही राजस्थान में 32 निकायों में अध्यक्ष पद का चुनाव निर्विरोध हो चुका था। अब तक घोषित परिणामों के बाद भाजपा सबसे ज्यादा अध्यक्ष पदों के साथ आगे है। हालांकि कई जगह कांग्रेस के ज्यादा पार्षद होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवारों के जीतने से क्रॉस वोटिंग, निर्दलीयों के समर्थन और चुनावी मैनेजमेंट की भूमिका चर्चा में है। अजमेर और पाली इसके सबसे बड़े उदाहरण बनकर सामने आए हैं।
अब जयपुर समेत इन शहरों पर नजर
राजस्थान निकाय चुनाव की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। जयपुर, जोधपुर और कोटा समेत कुछ निकायों में मेयर पद के चुनाव 25 सितम्बर को होने हैं। ऐसे में अब सियासी नजरें इन तीनों बड़े नगर निगमों पर टिक गई हैं।
