एनसीआई@कोटा
राजस्थान के कोटा स्थित विज्ञान नगर क्षेत्र से सामने आया मनीष शर्मा उर्फ कथित ‘मोइन खान’ का मामला लगातार चर्चा और विवाद का केन्द्र बना हुआ है। शुरुआत में इस मामले को टेलीग्राम ग्रुप पर अश्लील सामग्री शेयर करने तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब इसने एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक रूप ले लिया। बजरंग दल इस पूरे प्रकरण को ‘द कोटा स्टोरी’ (The Kota Story) करार देते हुए इसे कथित धर्मांतरण और हिन्दू महिलाओं को निशाना बनाने का एक गम्भीर नेटवर्क बता रहा है। वहीं, पुलिस जांच में अब तक की कहानी बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
बजरंग दल के गम्भीर आरोप: ‘बदला नाम, फंसाई लड़कियां’
मामले की शुरुआत 15 जून को हुई, जब बजरंग दल के कार्यकर्ता योगेश रेनवाल की शिकायत पर विज्ञान नगर थाने में आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर मनीष शर्मा को गिरफ्तार किया गया।
बजरंग दल का आरोप है कि विज्ञान नगर निवासी मनीष शर्मा ने कथित रूप से अपना नाम बदल कर ‘मोइन खान’ रख लिया है। आरोप है कि उसने टेलीग्राम, स्नेपचेट और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए हिन्दू युवतियों को अपने जाल में फंसाया। योगेश रेनवाल का दावा है कि आरोपी के मोबाइल में बड़ी संख्या में ऐसे आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जिनमें ‘ओम’, ‘स्वास्तिक’ और ‘शिवलिंग’ जैसे पवित्र धार्मिक प्रतीकों का कथित तौर पर अपमान किया गया है। संगठन ने इस पूरे नेटवर्क के गहन खुलासे की मांग की।
पुलिस ने नकारा दावा: ‘न धर्मांतरण हुआ, न फंसाने के सबूत’
बजरंग दल के दावों के विपरीत, पुलिस की जांच में अब तक ‘लव जिहाद’ या धर्मांतरण जैसा कोई एंगल सामने नहीं आया है। कोटा के एएसपी सुभाष मिश्रा के अनुसार, जांच और मेडिकल परीक्षण में मनीष शर्मा के ‘मोइन खान’ बनने या धर्म परिवर्तन करने के कोई भी तथ्य सामने नहीं आए हैं।
एएसपी ने बताया कि हिन्दू युवतियों को फंसाने की साजिश के आरोपों की भी गहनता से जांच की गई है, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला है। हालांकि, पुलिस को कुछ टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स की जानकारी जरूर मिली है, जिनकी साइबर सेल द्वारा डिजिटल और तकनीकी जांच की जा रही है।
परिजनों और पड़ोसियों का बचाव
दूसरी तरफ, मनीष शर्मा के परिवारजन शुभम शर्मा और कुबेर शर्मा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। परिवार का कहना है कि मनीष शादीशुदा है और एक बच्चे का पिता है। उसका ऐसी किसी संदिग्ध गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। पड़ोसियों ने भी मनीष को एक सामान्य व्यक्ति बताया है, जिसकी दिनचर्या सिर्फ घर से दुकान और दुकान से घर तक सीमित रहती है।
फिलहाल यह सनसनीखेज आरोप वाला मामला दो अलग-अलग दावों के बीच उलझा हुआ है। एक तरफ हिन्दू संगठनों के गम्भीर आरोप हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस की जांच और परिजनों का बचाव। इस पूरे मामले की अंतिम सच्चाई पुलिस की फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
इस प्रकार अब तक की जांच में-
• आरोपी के धर्म परिवर्तन का प्रमाण नहीं मिला है।
• उसके ‘मोइन खान’ नाम अपनाने की पुष्टि नहीं हुई है।
• किसी संगठित धर्मांतरण नेटवर्क या पाकिस्तान से जुड़े बड़े षड्यंत्र के दावों का भी अभी तक ठोस साक्ष्य नहीं मिला है।
वहीं, शिकायतकर्ताओं के दावे बरकरार हैं। बजरंग दल और शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी के मोबाइल से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक फोटो-वीडियो और ऑडियो मिले हैं। मामला व्यापक नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। इन दावों की जांच चल रही है और पुलिस ने इन्हें अभी सत्यापित नहीं माना है।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे चला घटनाक्रम
15 जून 2026 – एफआईआर दर्ज
कोटा के विज्ञान नगर थाने में बजरंग दल के कार्यकर्ता योगेश रेनवाल की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मनीष शर्मा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Telegram, Snapchat, Discord आदि) पर हिन्दू महिलाओं को फंसाने, आपत्तिजनक सामग्री तैयार कराने, ब्लैकमेल करने और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने वाले समूहों से जुड़ा है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दर्ज की गई।
15 से 20 जून तक
पुलिस ने आरोपी मनीष शर्मा को गिरफ्तार कर उसका मोबाइल फोन जब्त कर सोशल मीडिया अकाउंट खंगालने शुरू किए। साइबर टीम ने चैट, फोटो, वीडियो और टेलीग्राम ग्रुप की तकनीकी जांच शुरू की।
22 जून
शिकायतकर्ता संगठन ने मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन भेजा।
केन्द्रीय एजेंसी से जांच की मांग की गई।
24–25 जून
कई मीडिया संस्थानों में निम्न दावे सामने आए—
• आरोपी ने कथित रूप से ‘मोइन खान’ नाम अपनाया।
• हजारों आपत्तिजनक वीडियो मिलने का दावा।
• पाकिस्तान से जुड़े ऑडियो और ऑनलाइन नेटवर्क के आरोप।
• तथाकथित ‘जिहाद अल अकबर’ नामक चैट समूहों का उल्लेख।
25–26 जून – पुलिस का आधिकारिक पक्ष
कोटा पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने मीडिया को बताया—
• धर्म परिवर्तन का कोई प्रमाण अभी तक नहीं मिला।
• मनीष शर्मा के ‘मोइन खान’ नाम से धर्म परिवर्तन की पुष्टि नहीं हुई।
• पाकिस्तान कनेक्शन का कोई पुष्ट साक्ष्य अभी नहीं मिला।
• जांच में यह सामने आया है कि आरोपी कुछ टेलीग्राम समूहों से जुड़ा था तथा अश्लील/पोर्नोग्राफिक सामग्री डाउनलोड करता था। डिजिटल फोरेंसिक जांच अभी जारी है।
27–28 जून (वर्तमान स्थिति)
• आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में है।
• मोबाइल और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच जारी है।
• पुलिस ने कहा है कि अंतिम निष्कर्ष फोरेंसिक रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही निकलेगा।
कुल मिलाकर यह मामला तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण है—
• साइबर अपराध: यदि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साबित करते हैं कि हिन्दू महिलाओं को ऑनलाइन फंसाकर ब्लैकमेल किया गया, तो यह गंभीर साइबर अपराध का मामला होगा।
• धार्मिक पहलू: शिकायत में धर्मांतरण और धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन पुलिस अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं कर सकी है। इसलिए इन दावों को अभी स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
• डिजिटल फोरेंसिक का महत्व: इस पूरे मामले का परिणाम मोबाइल डेटा, क्लाउड बैकअप, चैट रिकवरी, ऑडियो-वीडियो की प्रामाणिकता और फोरेंसिक रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
