April 27, 2026

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कोटा रिवर फ्रंट पर बड़ा हादसा: दुनिया की सबसे बड़ी घंटी को निकालते समय इंजीनियर और मजदूर 35 फीट ऊंचाई से गिरे, मौत

कोटा रिवर फ्रंट पर बड़ा हादसा: दुनिया की सबसे बड़ी घंटी को निकालते समय इंजीनियर और मजदूर 35 फीट ऊंचाई से गिरे, मौत

एनसीआई@कोटा

कोटा रिवर फ्रंट पर लगी दुनिया की सबसे बड़ी घंटी को रविवार को मोल्ड बॉक्स से निकालते समय बड़ा हादसा हो गया। मोल्ड बॉक्स पर चढ़े कास्टिंग इंजीनियर देवेन्द्र आर्य और उनके साथ खड़ा मजदूर करीब 35 फीट ऊंचाई से नीचे गिर गए। इसके बाद दोनों को गम्भीर घायल अवस्था में तलवंडी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां दोनों की मौत हो गई।

बैलेंस बिगड़ने से हुआ हादसा

कुन्हाड़ी थानाधिकारी महेन्द्र कुमार ने बताया कि मोल्ड बॉक्स से घंटी को निकालने का काम चल रहा था। अपराह्न 3 बजे करीब इंजीनियर देवेन्द्र आर्य और मजदूर छोटू मोल्ड बॉक्स से घंटी को निकालने में जुटे हुए थे। हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से इस घंटी को निकाला जा रहा था। इस दौरान सबसे ऊपर वाला गार्डर (लोहे का जॉइंट) हाइड्रोलिक मशीन से टच होते ही खिसक गया और तीन टुकड़ों में टूट गया। इससे दोनों‌ का बैलेंस बिगड़ गया और वे 35 फीट ऊंचाई से नीचे आ गिरे। इस हादसे में दोनों के सिर और हाथ-पैरों पर गम्भीर चोट आई थी। इस पर दोनों को अस्पताल ले जाया गया। मजदूर छोटू की तो अस्पताल ले जाते ही मौत हो गई, वहीं इंजीनियर आर्य ने इलाज के दौरान शाम 5 बजे दम तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि घंटी मोल्ड बॉक्स के सांचे में है और इसे इसी महीने निकाला जाना था।

विवाद के बाद आर्य को दुबारा बुलाया था

दुनिया की सबसे बड़ी घंटी को सांचे से बाहर निकालने का काम इसी महीने फिर से शुरू किया गया था। यूआईटी और ठेकेदार ने इसके लिए सांचे में ढालने वाले इंजीनियर देवेन्द्र आर्य को 3 नवम्बर को बुलाया था। इससे पहले 80 दिन तक यूआईटी और ठेकेदार ने ही घंटी को निकालने की कोशिश की थी, मगर ये इसमें सफल नहीं हो पाए थे। इसलिए इंजीनियर देवेन्द्र को फिर से बुलाया गया था। इसके बाद इसे सांचे से निकालने का काम शुरू कर दिया गया था। उल्लेखनीय है कि 79 हजार किलो वजन की घंटी की ढलाई देवेन्द्र आर्य ने रिवर फ्रंट पर अस्थाई फेक्ट्री लगाकर की थी।

यह हुआ था विवाद

17 अगस्त को इसे सांचे में ढाल दिया गया था, लेकिन बाद में श्रेय लेने की होड़ में आर्किटेक्ट अनूप और आर्य के बीच विवाद हो गया था। इससे देवेन्द्र घंटी को सांचे से निकाले बिना ही लौट गए थे। देवेन्द्र आर्य ने दावा किया था कि घंटी की ढलाई के दौरान उन्होंने जिन केमिकल का इस्तेमाल किया था, उनमें रिएक्शन करवाने के बाद ही उसे निकाला जा‌ सकेगा। इसकी जानकारी उनके अलावा किसी को नहीं है।

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