एनसीआई@कोटा/भीलवाड़ा
भीलवाड़ा की अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा (एडीपीसी) डॉ. कल्पना शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार की कई गम्भीर शिकायतें हैं। यही नहीं जिला कलक्टर उन्हें 17 सीसी में चार्जशीट तक दे चुके हैं। इसके बावजूद लम्बे समय बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होना, विभाग में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है। एडीपीसी को निलम्बित किया जाना तो दूर उनका यहां से स्थानांतरण तक नहीं हुआ है। इस मामले में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का मानना है कि एक पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी के प्रभाव के कारण ऐसा हो रहा है। चर्चा है कि इन पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी की पहुंच विभाग में एकदम शीर्ष तक है और इनके एडीपीसी से निकट सम्बन्ध हैं। दूसरी ओर इस स्थिति को भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी भी पार्टी के लिए असहज स्थिति बता रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि डॉ. कल्पना शर्मा भीलवाड़ा में एडीपीसी के पद पर नियुक्त होने के बाद से ही लगातार विवादों में हैं। सामान्य कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक उनकी कार्यशैली और व्यवहार से संतुष्ट नहीं हैं। मगर डॉ. कल्पना शर्मा की कथित ऊंची पहुंच के चलते वे भी इस विषय पर कुछ भी कहने से बचते हैं। बात चलने पर बस चुप रह जाते हैं, मगर डॉ. कल्पना शर्मा पर लगे आरोपों को नकारते भी नहीं हैं।
जिला कलक्टर ने यह की थी कार्यवाही
जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू ने एडीपीसी डॉ. कल्पना शर्मा को कार्य प्रणाली के प्रति उदासीनता और लापरवाही का दोषी माना था। इस पर जिला कलक्टर संधू ने एडीपीसी डॉ. कल्पना शर्मा को 17 सीसी में चार्जशीट जारी की थी। व्यक्तिगत सुनवाई में एडीपीसी के जवाब से कलक्टर संतुष्ट नहीं हुए थे। इस पर कलक्टर ने फरवरी 2026 में एडीपीसी को दोषी करार देते हुए उनकी दो असंचयी वेतन वृद्धि रोकने के आदेश तक जारी किए थे। यही नहीं राज्य परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा की तत्कालीन निदेशक अनुपमा जोरवाल ने भी अनियमितताओं पर एडीपीसी डॉ. कल्पना शर्मा को दो बार नोटिस जारी किए थे।

यह है मामला
एडीपीसी कार्यालय में संविदा अर्थात ठेके पर लगे हुए दो सरकारी वाहनों के दुरुपयोग के मामले का आरटीआई से खुलासा हुआ था। यह खबर अखबारों में आने के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मामले की जांच करवाई थी। जांच टीम ने डॉ. कल्पना शर्मा को सुपरविजन में नेगलिजेंसी (निगरानी में लापरवाही) का दोषी माना था। मगर इस जांच के बाद विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की।
संवेदकों ने भी लगाए गम्भीर आरोप

भीलवाड़ा जिले के संवेदकों ने जिला कलक्टर को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि समसा में एडीपीसी कल्पना शर्मा ने भ्रष्टाचार के नाम पर आतंक मचा रखा है। आगे कहा गया है कि, वह हम लोगों को धमकाती हैं कि तुम मेरा कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि मेरा पति सांसद का निजी सहायक है। यदि आपको समसा में कार्य करना है तो मेरे सिस्टम में चलना होगा, नहीं तो मैं आपका एक भी बिल पास नहीं करूंगी। बिल भुगतान में रुकावट डालने के लिए कई प्रकार के प्रमाण पत्र मांगती हैं, जिससे बिल भुगतान में देरी हो रही है।
संवेदकों ने आगे लिखा है, बिल का सम्बन्धित कनिष्ठ अभियन्ता और सहायक अभियन्ता के प्रमाणीकरण के बाद कनिष्ठ लेखाकार और सहायक लेखाधिकारी द्वारा सभी प्रकार की जांचें कर भुगतान किया जाता है, फिर भी हमें भ्रष्टाचार के कारण परेशान कर रही हैं। इससे हमारा कार्य करने का मानसिक संतुलन खो गया है, यदि इनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई तो भ्रष्टाचार चरम सीमा पार कर जाएगा। हम लोग आगामी दिनों में कार्य बंद कर देंगे।

यह भी आरोप है कि, कल्पना शर्मा जब राजकीय स्वामी विवेकानन्द मॉडल स्कूल, बनेड़ा की प्रधानाचार्य थीं, उस दौरान बनवाया विद्यालय भवन 5 वर्ष के पहले जर्जर हो गया, इसकी भी जांच कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।
इस प्रार्थना पत्र की कॉपी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भीलवाड़ा व मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी समग्र शिक्षा, भीलवाड़ा को भी दी गई थी।
जिला कलक्टर ने गलत चार्जशीट दी: डॉ. कल्पना शर्मा
इस मामले में एडीपीसी कल्पना शर्मा का कहना है कि डीएमएफटी में घोटाले को लेकर जिला कलक्टर ने मुझे गलत चार्जशीट दी है, क्योंकि जिस अवधि का मामला है, उस समय डीओ (जिला शिक्षा अधिकारी) मैं नहीं थी। मुझे फंसाया जा रहा है।

अगर ऐसी बात तो सख्त कार्रवाई होगी: दिलावर
दूसरी ओर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से फोन पर सम्पर्क कर मामले की जानकारी दी तो उन्होंने कहा-अभी किसी कार्यक्रम में हूं। अगर ऐसी कोई बात है तो एडीपीसी डॉ. कल्पना शर्मा के खिलाफ खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। वहीं भीलवाड़ा जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू से सम्पर्क करने की कोशिश की, मगर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
गौरतलब है कि राज्य का शिक्षा विभाग छोटी से छोटी शिकायत पर शिक्षकों, व्याख्याताओं, जिला शिक्षा अधिकारियों तक पर तुरंत एक्शन लेता है। इसके उलट भीलवाड़ा एडीसीपी डॉ. कल्पना शर्मा के मामले में विभाग का रवैया उलटा हो। इसलिए ही गम्भीर सवाल उठ रहे हैं।
