एनसीआई@जोधपुर
जोधपुर में सरकारी रिकॉर्ड और वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में बहुत बड़ा खेल हुआ है। वो ऐसे कि शहर में दो जजों के सरकारी बंगलों से लेकर गीता भवन, स्कूल-कॉलेज और मंदिरों तक को वक्फ सम्पत्ति के तौर पर दर्ज कर दिया गया है। मामला खसरा नंबर 482, 485 और 490 से जुड़ा हुआ है। इस पर आश्रम और कई अन्य सार्वजनिक व निजी सम्पत्तियां भी स्थित हैं।सामने आया है कि राजस्व रिकॉर्ड में तो ये सम्पत्तियां नगर निगम के नाम हैं, मगर वक्फ पोर्टल पर इन्हें वक्फ सम्पत्ति दर्शाया गया है।
जोधपुर से हैरान करने वाली बहुत बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, वक्फ बोर्ड ने उस जमीन को भी वक्फ की प्रॉपर्टी बता दिया है, जिस पर हाईकोर्ट के दो जजों के सरकारी बंगले, गीता भवन, स्कूल-कॉलेज और चार मंदिर भी हैं। वक्फ बोर्ड ने इस पूरी जमीन को वक्फ की सम्पत्ति घोषित कर दिया। दूसरी ओर, राजस्व रिकॉर्ड में तो ये सभी सम्पत्तियां नगर निगम के नाम पर दर्ज हैं, लेकिन सरकार के उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बोर्ड ने इन्हें अपनी सम्पत्ति बता रखा है। जो सम्पत्तियां उम्मीद पोर्टल पर अपलोड हैं, उनकी एंट्री वक्फ बोर्ड के गजट में भी है।

हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
जोधपुर शहर की जिस जमीन का यह विवाद है, वह काफी पॉश इलाका है। दशकों से यहां रह रहे लोगों का दावा है कि यह इलाका 250 साल पहले बसा था, लेकिन वक्फ इसे अब कब्रिस्तान की जमीन क्लेम कर रहा है। विवाद बढ़ा तो हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। साथ ही केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, वक्फ मंत्रालय, राजस्व विभाग और जिला कलेक्टर से 14 दिन के भीतर जवाब मांगा है।
अपना दावा कर दिया, परेशानी है तो आकर सबूत दिखाएं
राजस्थान वक्फ बोर्ड ने अपनी सफाई दी है। हाईकोर्ट और राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है कि उनका दावा पूरे इलाके पर नहीं है, सिर्फ 14.77 हेक्टेयर जमीन की 5 वक्फ सम्पत्तियों को क्लेम किया गया है। फिर भी किसी को आपत्ति है तो कानूनन इसका निपटारा करे। वक्फ के मुतवल्ली का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने अपना दावा कर दिया है, जिसे परेशानी है वो आकर सबूत दिखाएं।
61 साल से वक्फ बोर्ड कहां सो रहा था?
वहीं, वक्फ बोर्ड के इस दावे से वो लोग परेशान हैं, जिनके घर इस जमीन पर बने हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि वक्फ बोर्ड की यह आदत बन गई है। वो किसी भी सम्पत्ति को अपना बता देता है। लोगों ने कहा कि वक्फ ने अब इस जमीन पर क्लेम क्यों किया? 61 साल से वक्फ बोर्ड कहां सो रहा था?
ऐसा नहीं होने दिया जाएगा: भाजपा विधायक
वक्फ बोर्ड के दावे वाली जमीन पर गीता भवन भी बना हुआ है। यह जमीन 1995 के सरकारी गैजेट में गीता भवन के नाम पर दर्ज है। नगर निगम ने 1965 में इसका पट्टा भी जारी किया था, फिर वक्फ इस पर कैसे क्लेम कर सकता है? जोधपुर के बीजेपी एमएलए अतुल भंसाली ने वक्फ बोर्ड की मनमानी के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। अतुल भंसाली ने कहा कि पहले की सरकारों की मिली-भगत से कई जमीनें वक्फ बोर्ड ने हड़प ली, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
केन्द्र सरकार ने किया था वक्फ एक्ट में बदलाव
उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने वक्फ बोर्ड के इसी तरह के विवादों को खत्म करने के लिए वक्फ एक्ट में बदलाव किया था। पहले जिस सम्पत्ति पर वक्फ बोर्ड उसका दावा कर देता था, वो उसकी हो जाती थी…लेकिन अब वक्फ बोर्ड की सम्पत्तियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। अगर इस पर कोई आपत्ति करता है तो मुकदमा चलेगा। इसलिए जोधपुर का मामला भी कोर्ट में जाएगा और हकीकत सामने आएगी।
यह है अपडेट
हाईकोर्ट ने विवादित भूमि और उससे जुड़े रिकॉर्ड पर फिलहाल यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि अंतिम निर्णय तक किसी प्रकार का म्यूटेशन, ट्रांसफर, लीज, निर्माण, ध्वस्तीकरण या ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे सम्पत्ति की कानूनी या भौतिक स्थिति बदल जाए।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की है कि यदि किसी सरकारी या निजी सम्पत्ति को वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है तो उसके लिए वक्फ अधिनियम और अन्य लागू कानूनों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। बिना विधिक प्रक्रिया और सम्बंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए, किसी सम्पत्ति की कानूनी स्थिति बदलना गम्भीर चिंता का विषय है।
दस्तावेजों की जांच शुरू
वक्फ बोर्ड ने अपनी ओर से कहा है कि उसका दावा पूरे इलाके पर नहीं, बल्कि लगभग 14.77 हेक्टेयर भूमि तक सीमित है। बोर्ड का कहना है कि यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
नगर निगम और प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड, वक्फ रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की त्रुटि या गलत प्रविष्टि पाई जाती है तो उसे कानून के अनुसार सुधारा जाएगा।
विवाद इसलिए है महत्वपूर्ण
यह मामला केवल भूमि स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सम्पत्तियों, धार्मिक स्थलों और सरकारी रिकॉर्ड की वैधता से भी जुड़ा है। हाईकोर्ट की निगरानी में अब यह स्पष्ट किया जाएगा कि सम्बंधित प्रविष्टियां किस आधार पर दर्ज हुईं और क्या उनके लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी। अंतिम स्थिति न्यायालय और जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
