अब भारतीयों की साइज के रेडीमेड कपड़ों की समस्या हो जाएगी दूर, सर्वे शुरू
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
कपड़े खरीदते समये सबसे बड़ी मुश्किल साइज का चुनाव करने में आती है। अक्सर देखा जाता है कि US के मीडियम साइज वाले कपड़े भारत के ऊंची-लम्बी कद-काठी वालों को आते हैं, लेकिन अब यह दिक्कत जल्दी ही दूर होने वाली है। भारत के लोगों पर अब एक ऐसा सर्वे किया जा रहा है, जिसमें भारतीयों की कद-काठी का माप लेकर उसी हिसाब से देश में ही कपड़े बनाए जाएंगे। गुरुवार को आधिकारिक तौर पर INDIAsize नाम से भारत सरकार ने एक सर्वे लॉन्च किया।
यूरोप के लोगों से तुलना करें तो भारतीयों की शारीरिक बनावट काफी अलग होती है। भारतीयों की बाजू यूरोपियन्स जितनी लम्बी नहीं होती हैं। इसलिए कई इंटरनेशनल ब्रेंड्स के कपड़े केवल गलत फिटिंग और साइज की वजह से लौटाए जाते हैं, जिससे कम्पनियों का भी नुकसान होता है। भारतीयों की कद-काठी के हिसाब से कपड़े बनने पर ये सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।
यह सर्वे कपड़ा मंत्रालय और नेशनल इंस्टीयूट ऑफ फेशन एंड टेक्नोलॉजी (NIFT) ने संयुक्त रूप से शुरू किया है। इस सर्वे का उद्देश्य रेडी-टू-वियर कपड़ों के क्षेत्र में भारत के लिए एक नया स्टेंडर्ड साइज चार्ट पेश करना है। वैसे तो इस प्रोजेक्ट की शुरूआत फरवरी, 2019 में की गई थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया था। फिलहाल ये सर्वे भारत के 6 शहरों में शुरू किया गया, जिसमें दिल्ली, चेन्नई, मुम्बई, हैदराबाद, शिलोंग और हैदराबाद शामिल हैं। अभी सिर्फ 18 देशों के पास उनका अपना साइज चार्ट है। इस सर्वे के बाद भारत भी अपने साइज चार्ट पर काम शुरू कर देगा।
इस सर्वे में शामिल होने वाले प्रतिभागियों का माप 3D बॉडी स्केनर टेक्नोलॉजी के जरिए लिया जा रहा है। यह पूरी तरह सुरक्षित है। सर्वे में राष्ट्रीय आकार सर्वेक्षण के सभी अन्तरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। इस सर्वे के नतीजे कुछ महीने में आ जाएंगे और इसे 2022 के अंत तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। नए साइज सर्वे को क्लॉथिंग मेन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) का समर्थन मिला है। इसके अलावा कपड़ों के अन्तरराष्ट्रीय ब्रांडों को सदस्यता देने और उनके लिए नए साइज चार्ट का पालन करने की बाध्यता की भी योजना है।
