15 वर्षीय नाबालिग से नृशंस तरीके से सामूहिक दुष्कर्म व इसके बाद उसकी हत्या कर देने के दोनों व्यस्क आरोपियों को पॉक्सो कोर्ट नम्बर 2 ने फांसी की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक महावीर सिंह कृष्णावत ने इसे राज्य का ही नहीं अपितु देश का ऐसा पहला मामला बताया है, जिसमें पॉक्सो मामले में दो दोषियों को एक साथ फांसी की सजा सुनाई गई है।
मामले के अनुसार जिले की खीण्या पंचायत के कालाकुआं गांव के जंगल में गत वर्ष 23 दिसम्बर को बकरियां चराने गई पन्द्रह वर्षीय आदिवासी किशोरी को अकेला देख कर पहले सुल्तान भील (23) व एक 17 वर्षीय किशोर ने दुष्कर्म किया। इस दौरान अपने बचाव के लिए बुरी तरह चीखती-चिल्लाती व बिलखती इस किशोरी को आरोपियों ने बुरी तरह दांतों से काटा, नाखूनों से नोंचा व घसीटा, उसे पत्थर भी मारे। यहां से वह किसी प्रकार बच कर अपने मुंहबोले नाना 62 वर्षीय छोटू लाल के पास गई तो उसने भी उससे दुष्कर्म किया। तीनों आरोपी नशे में धुत थे। दुष्कर्म के बाद इन आरोपियों ने चुन्नी से उसका गला दबाकर हत्या कर दी। इनकी हैवानियत की पराकाष्ठा तो तब हो गई जब इन्होंने किशोरी की लाश से भी अपनी हवस पूरी की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है।
दिल दहला देने वाली इस वारदात को पुलिस ने बेहद गम्भीरता से लिया और डॉग स्क्वायड की मदद से 12 घंटे में इसका खुलासा कर दिया था। पुलिस ने सुल्तान व छोटूलाल भील को गिरफ्तार करने के साथ नाबालिग आरोपी को निरुद्ध किया। नाबालिग आरोपी के खिलाफ किशोर न्यायालय में अलग से प्रकरण चल रहा है।
10 थानाधिकारी, 200 जवानों ने छाना था जंगल
मामले में पुलिस अधीक्षक जय यादव ने इस बेहद सर्द रात को 10 थानाधिकारियों के साथ 200 जवानों की मदद से पूरे कालाकुआं के जंगलों को छान डाला था। इसमें ड्रेगन लाइटों व डॉग स्क्वायड की मदद ली गई थी। इसमें सबसे पहला सबूत एक आरोपी के अंडरवियर के रूप में मिला था। इसी से आगे वारदात की कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और रात भर की इस खोजबीन के बाद दिन निकलने से पहले ही पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। इस मामले में केस ऑफिसर बूंदी डीएसपी हेमंत नोगिया थे।
अभिभाषक परिषद ने लिया था यह फैसला
किशोरी से हैवानियत के इस मामले में अभिभाषक परिषद ने आरोपी की ओर से पैरवी नहीं करने का फैसला लिया था। इस पर इन्हें विधिक सेवा की ओर से वकील उपलब्ध कराया गया।
न्यायालय में इस मामले की बहस कल अर्थात 28 अप्रेल को पूरी हो गई थी। इसके बाद न्यायाधीश ने फैसला सुनाने के लिए आज अर्थात 29 अप्रेल की तारीख निश्चित की थी। इस मामले में विशेष लोक अभियोजक महावीर सिंह कृष्णावत ने दोनों आरोपियों को अधिकतम सजा के रूप में फांसी की सजा देने की मांग की थी। इन आरोपियों पर 1 लाख 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
एएसपी किशोरी लाल।
एसपी जय यादव के कुशल नेतृत्व से मिली सफलता
न्यायालय से आए इस फैसले के बाद एएसपी किशोरी लाल ने कहा कि बूंदी पुलिस को यह सफलता एसपी जय यादव के कुशल निर्देशन के कारण ही मिल पाई है।