बूंदी: अदालत से तलाक हो चुकने के बावजूद लोक अदालत ने 6 महीने तक पति-पत्नी की समझाइश कर वापस बसा दिया घर
एनसीआई@बूंदी
न्यायालय में तलाक की डिक्री पारित होने के बाद भी लोक अदालत में हुई समझाइश से पति-पत्नी फिर से प्रेमपूर्वक अपना जीवन गुजरा रहे हैं। लोक अदालत में आपसी समझाइश से निस्तारित हुआ यह प्रकरण अपने आप में अनूठा और समाज के लिए मिसाल कायम करने वाला है।

पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा ने बताया कि 9 नवम्बर 2015 को इस जोड़े की शादी हुई थी। इसके बाद करीब चार वर्ष तक दोनों साथ रहे और इस दौरान उनके एक पुत्र का जन्म हुआ। इसके बाद किसी बात को लेकर दोनों के बीच मनमुटाव हो गया। इससे पत्नी अपने पीहर चली गई। पीहर में रहने के दौरान ही पति 2019 में लकवाग्रस्त हो गया और न्यायालय की ओर से 12 फरवरी, 2021 को पति के पक्ष में एकतरफा तलाक की डिक्री पारित कर दी गई। पत्नी को जब बाद में पता लगा तो उसने न्यायालय के समक्ष उक्त एकपक्षीय डिक्री को खत्म करने के लिए प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने पति-पत्नी के मध्य लगभग 6 महीने तक लगातार समझाइश का प्रयास किया। इसके फलस्वरूप दोनों का राजीनामा सम्भव हुआ तथा आज दोनों आपस में प्रेमपूर्वक साथ-साथ रह रहे हैं।
इस प्रकार न्यायालय द्वारा तलाक की डिक्री पारित कर दिए जाने के बावजूद पति-पत्नी के बीच सुलह हो जाना और उनका वापस साथ रहना अनोखा मामला है। ऐसा लोक-अदालत के माध्यम से ही सम्भव हो सकता है।
