April 20, 2026

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फोन टेपिंग कांड: सीएम गहलोत के ओएसडी की दिल्ली पुलिस के सामने पेशी, 5 घंटे तक हुई पूछताछ

फोन टेपिंग कांड: सीएम गहलोत के ओएसडी की दिल्ली पुलिस के सामने पेशी, 5 घंटे तक हुई पूछताछ

एनसीआई@नई दिल्ली

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा फोन टेपिंग मामले में पूछताछ के लिए सोमवार को दिल्ली पुलिस के सामने पेश हुए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शर्मा ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेशी दी। सीएम गहलोत के विशेषाधिकारी से लगभग पांच घंटे तक पूछताछ हुई।

इस मामले में लोकेश शर्मा ने कहा- मैं छठी बार जांच के लिए पेश हो रहा हूं। दिल्ली पुलिस ने मुझसे 4-5 घंटे पूछताछ की। मैंने दिल्ली पुलिस को उसके सवालों के जवाब दिए। मैं सहयोग कर रहा हूं। हमने इस एफआईआर को रद्द करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में रिट लगाई है। इस पर 20 फरवरी को सुनवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने भी इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। इसमें दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आवेदन दाखिल कर शर्मा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर से रोक हटाने का अनुरोध किया था। वहीं लोकेश शर्मा ने एफआईआर रद्द करने की गुहार लगाई है। क्राइम ब्रांच की अर्जी और प्राथमिकी रद्द करने सम्बन्धी शर्मा की ओर से दाखिल याचिका पर 20 फरवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है। इस सुनवाई से कुछ ही दिन पहले पूछताछ हुई है।

यह है मामला

जोधपुर से भाजपा के सांसद और केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 25 मार्च 2021 को दिल्ली पुलिस में लोकेश शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और गैरकानूनी रूप से टेलीग्राफिक सिग्नल (टेलीफोनिक बातचीत) को बाधित करने के आरोप लगाए गए थे। वहीं लोकेश शर्मा ने इस प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जून, 2021 को लोकेश शर्मा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जो अब भी जारी है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीआरपीसी की धारा 41.1 (ए) के तहत शर्मा को छठा नोटिस जारी किया था। वह दो बार 6 दिसम्बर 2021 और 14 मई 2022 को अपराध शाखा के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हो चुके हैं। पिछले महीने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक आवेदन दाखिल किया था, जिसमें दंडात्मक कार्रवाई पर रोक को रद्द करने की मांग की गई थी।

क्राइम ब्रांच का यह है पक्ष

क्राइम ब्रांच का कहना है कि अदालत के आदेश से अंतरिम संरक्षण का दुरुपयोग हो रहा है। इससे छानबीन में देरी हो रही है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस शासित राजस्थान में जुलाई 2020 में राजनीतिक संकट के दौरान फोन-टेपिंग विवाद सामने आया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक 18 विधायकों की बगावत के दौरान केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और कांग्रेस नेताओं के बीच टेलीफोन पर हुई कथित बातचीत के ऑडियो क्लिप सामने आए थे। मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेश शर्मा पर ऑडियो क्लिप प्रसारित करने के आरोप लगे थे। हालांकि, लोकेश शर्मा आरोपों को खारिज कर चुके हैं।

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