एनसीआई@बूंदी
विश्व प्रसिद्ध बूंदी चित्र शैली को अब अकादमिक स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। नई पीढ़ी को इस ऐतिहासिक कला से रूबरू कराने और कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से इसे कोटा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इस सम्बंध में मंगलवार को कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरू बीएल सारस्वत की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई।
बैठक में जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव, कोटा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मुरलीधर प्रतिहार और चित्रकला विभाग की प्रोफेसर शालिनी भारती ने बूंदी चित्र शैली से जुड़े स्थानीय कलाकारों के साथ इस योजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक के दौरान बूंदी और कोटा चित्रशैली पर आधारित एक वर्ष और 6 महीने की अवधि वाले सर्टिफिकेट व डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर व्यापक चर्चा हुई। विवि प्रशासन और कलाकारों ने मिलकर पाठ्यक्रम के विभिन्न अकादमिक और व्यावहारिक पहलुओं पर मंथन किया, ताकि छात्रों को कला की बारीकियां ठीक से सिखाई जा सकें।
पूर्ण रूप से व्यावसायिक पाठ्यक्रम तैयार हो
बैठक में जिला कलक्टर ने कहा कि बूंदी चित्र शैली के इस पाठ्यक्रम को पूरी तरह से व्यावसायिक रूप दिया जाए। इससे न केवल नई पीढ़ी इस पारंपरिक कला को सहेज सकेगी, बल्कि युवा इसके माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर सकेंगे। उन्होंने बूंदी चित्र शैली से जुड़े स्थानीय कलाकारों से आह्वान किया कि वे जल्द से जल्द इस पाठ्यक्रम का खाका तैयार करें, ताकि बिना किसी देरी के इसी शैक्षणिक सत्र से इसे विधिवत शुरू करवाया जा सके।
बैठक में ये भी रहे मौजूद
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर एचडी सिंह, इंटेक के संयोजक राजकुमार दाधीच, पर्यटन अधिकारी प्रेम शंकर सैनी, जाने-माने पुरातत्ववेत्ता ओम प्रकाश कुक्की के अलावा बूंदी चित्र शैली के प्रमुख कलाकार सुनील जांगिड़, पंकज सिसोदिया और विवेक उत्प्रेजा भी मौजूद रहे।
