April 21, 2026

News Chakra India

Never Compromise

केन्द्र सरकार ने बड़े फैसले से किया पलटवार, तिलमिला गया विपक्ष

केन्द्र सरकार ने बड़े फैसले से किया पलटवार, तिलमिला गया विपक्ष

अब से देशभर में हर साल 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा

एनसीआई@नई दिल्ली

केन्द्र सरकार ने हर साल 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने के सम्बन्ध में भारत सरकार की ओर से अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। वहीं, सरकार के इस बड़े फैसले से पूरा विपक्ष पूरी तरह तिलमिला गया है, खासकर कांग्रेस पार्टी। यहां बड़ी बात यह है कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान से लेकर शपथ ग्रहण के समय तक कांग्रेसी नेता संविधान की प्रतियां लहराते हुए संविधान बचाने की बात कर रहे थे। उन्हें केन्द्र सरकार ने अपने इस फैसले से आइना दिखा दिया है।

‘संविधान हत्या दिवस’ की घोषणा के लिए जारी अपनी अधिसूचना में सरकार ने कहा है कि, “25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई थी, उस समय की सरकार ने सत्ता का घोर दुरुपयोग किया था। भारत के लोगों को देश के संविधान और भारत के मजबूत लोकतंत्र पर दृढ़ विश्वास है। इसलिए भारत सरकार ने आपातकाल की अवधि के दौरान सत्ता के घोर दुरुपयोग का सामना और संघर्ष करने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ घोषित किया है और भारत के लोगों को भविष्य में किसी भी तरह से सत्ता के घोर दुरुपयोग का समर्थन नहीं करने के लिए पुनः प्रतिबद्ध किया है।”

गृहमंत्री अमित शाह ने यह दी प्रतिक्रिया

सरकार के इस फैसले सम्बन्ध में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तानाशाही मानसिकता का परिचय देते हुए देश पर आपातकाल थोपकर हमारे लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंट दिया था। लाखों लोगों को बिना किसी गलती के जेल में डाल दिया गया और मीडिया की आवाज को दबा दिया गया।”

अमित शाह ने आगे लिखा है, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य उन लाखों लोगों के संघर्ष का सम्मान करना है, जिन्होंने तानाशाही सरकार की असंख्य यातनाओं व उत्पीड़न का सामना करने के बावजूद लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष किया। ‘संविधान हत्या दिवस’ हर भारतीय के अंदर लोकतंत्र की रक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अमर ज्योति को जीवित रखने का काम करेगा, ताकि कांग्रेस जैसी कोई भी तानाशाही मानसिकता भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न कर पाए।”

इसलिए लगाया गया था आपातकाल

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1975 में 25 जून की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू करने का ऐलान किया था। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद यह कदम उठाया था। दरअसल, हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रायबरेली से निर्वाचन को रद्द कर दिया था। यही नहीं अगले 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध भी लगा दिया था। इसके बाद इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग शुरू हो गई थी और देश में जगह-जगह आंदोलन होने लगे थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था। इसी के बाद अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी। इससे पूरे देश में खलबली मच गई थी। ‌ विपक्षी राजनीतिक पार्टियां सड़कों पर उतर आईं थीं। इसके बाद इंदिरा गांधी सरकार ने बड़े छोटे नेताओं को जेलों में ठूसना शुरू कर दिया था। इस दौरान उन पर काफी अमानवीय अत्याचार हुए। ‌ इसमें कई नेताओं की दर्दनाक मौत भी हुई। देश की जनता के पास उस समय अदालत का सहारा लेने का अधिकार भी नहीं बचा था।

कब और कैसे लगता है आपातकाल?

भारत के संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने का अधिकार है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश पर आपातकाल की घोषणा की जाती है। इसके तहत नागरिकों के सभी मौलिक अधिकार निलम्बित हो जाते हैं। जब सम्पूर्ण देश या किसी राज्य पर अकाल, बाहरी देशों के आक्रमण या आंतरिक प्रशासनिक अव्यवस्था या अस्थिरता आदि की स्थिति उत्पन्न हो जाए, उस समय उस क्षेत्र की सभी राजनैतिक और प्रशासनिक शक्तियां राष्ट्रपति के हाथों में चली जाती हैं। भारत में अब तक कुल तीन बार आपातकाल लग चुका है।‌ इसमें वर्ष 1962, 1971 तथा 1975 में अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया था। आपातकाल पहली और दूसरी बार तो युद्ध काल के कारण लगाया गया था। मगर 1975 में तीसरी बार इसे इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता लोलुपता के कारण लगाया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.